श्री विष्णु सहस्रनाम अर्चन एवं तुलसी दल पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग "विष्णु सहस्रनाम" का पाठ बताया था। आदि शंकराचार्य ने इस पर अपना प्रसिद्ध भाष्य लिखा है। इस अनुष्ठान में भगवान विष्णु के प्रत्येक नाम के साथ "ॐ विष्णवे नमः", "ॐ जिष्णवे नमः" बोलते हुए शालिग्राम शिला पर एक-एक तुलसी दल अर्पित किया जाता है। यह समस्त ग्रहों की शांति तथा मानसिक शुद्धि का महामंत्र है।
आदि शंकराचार्य के अनुसार "गेयं गीता नामसहस्रं" अर्थात गीता का गान और विष्णु सहस्रनाम का जप ही इस संसार सागर को पार करने की नौका है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
मानसिक अशांति व भय से मुक्ति, कुंडली के समस्त ग्रह दोषों की शांति, व्यापारिक समृद्धि एवं मोक्ष प्राप्ति।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. स्वस्तिवाचन एवं यजमान संकल्प
2. शालिग्राम भगवान का पंचामृत अभिषेक
3. 1008 तुलसी दलों का विष्णु सहस्रनाम के प्रत्येक नाम से अर्चन
4. पुरुष सूक्त एवं श्री सूक्त का सस्वर पाठ
5. पीतांबर एवं पीले पुष्पों से महाशृंगार
6. 108 आहुति विष्णु हवन
7. महाआरती एवं चरणामृत वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: 1008 ताजे तुलसी दल, शालिग्राम जी, गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, केसर, पीला चंदन, पीतांबर वस्त्र, शुद्ध घी, पंचामृत।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
पुरुष सूक्त के 16 मंत्रों तथा विष्णु गायत्री से 108 आहुतियों का पावन हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन विष्णु मंदिर / वैदिक आश्रम पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक गुरुवार, एकादशी (विशेषकर निर्जला, देवउठनी), वैकुंठ एकादशी। प्रातः 07:00 बजे से 11:00 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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