वट सावित्री व्रत एवं यमराज-सत्यवान रक्षा पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
महाभारत के अनुसार पतिव्रता सती सावित्री ने अपने तपोबल से यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। उज्जैन के सिद्धवट तीर्थ पर वट सावित्री पूजन करने से पति को अकाल मृत्यु से सुरक्षा और निरोगी काया की प्राप्ति होती है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
पति की दीर्घायु, अकाल मृत्यु संकट निवारण, अखंड सौभाग्य एवं दांपत्य जीवन में अटूट प्रेम।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. प्रातः स्नान कर पीत/लाल वस्त्र धारण व संकल्प
2. वटवृक्ष की जड़ में जल, दूध, चंदन व अक्षत अर्पण
3. कच्चे सूत से वटवृक्ष को 108 बार लपेटते हुए परिक्रमा
4. सती सावित्री व यमराज की कथा श्रवण
5. भीगे हुए चने, आम, खरबूजा व पंखा दान
6. पति के चरण स्पर्श, वटवृक्ष की कोंपल से व्रत पारण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: कच्चा सूत धागा, भीगे चने, आम, खरबूजा, बांस का पंखा, रोली, अक्षत, धूप-दीप, सुहाग सामग्री एवं फल।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण लेख
छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...
नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...