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वैदिक पूजा विधि

त्रिपिंडी श्राद्ध एवं अतृप्त पूर्वज मोक्ष विधान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 12 जून 2026 • 480 पाठक
त्रिपिंडी श्राद्ध एवं अतृप्त पूर्वज मोक्ष विधान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
उज्जैन के पावन सिद्धवट एवं रामघाट पर विगत 3 पीढ़ियों के ज्ञात-अज्ञात, अकाल मृत्यु व अतृप्त पितरों की सद्गति हेतु त्रिधा पिंड दान। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

गरुड़ पुराण एवं हेमाद्रि श्राद्ध कल्प के अनुसार, जब किसी कुल में किसी पूर्वज की अकाल मृत्यु हो अथवा नियमित वार्षिक श्राद्ध न हुआ हो, तो त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है। इसमें सतोगुणी (जौ), रजोगुणी (चावल) एवं तमोगुणी (तिल) के तीन पिंड बनाकर ब्रह्मा, विष्णु व रुद्र को समर्पित किए जाते हैं। सिद्धवट पर इसका अक्षय फल है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

पितृ दोष के कारण वंश वृद्धि में रुकावट, असाध्य रोग, बार-बार गर्भपात एवं घर में अशांति का शास्त्रीय निवारण।

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. शिप्रा नदी तट पर प्रायश्चित संकल्प व तीर्थ स्नान
2. ब्रह्मा, विष्णु एवं रुद्र का त्रिधा आवाहन
3. जौ, चावल व तिल से निर्मित तीन पिंडों का संस्कार
4. पितरों के नाम-गोत्र से तर्पण एवं पिंडी अर्पण
5. सिद्धवट पर दूध व जल अर्पण
6. ब्राह्मण भोजन, गौ-ग्रास, दीपदान एवं आशीर्वाद

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: जौ का आटा, चावल का आटा, काले तिल, कुशा घास, गंगाजल, सफेद पुष्प, तुलसी दल, जौ, पंचामृत, गाय का कच्चा दूध एवं दक्षिणा।।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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