सूर्य ग्रह शांति एवं आदित्य हृदय स्तोत्र पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
सूर्य संपूर्ण जगत की आत्मा, पिता, मान-सम्मान, उच्च पद, सरकारी सेवा एवं नेत्र-हृदय स्वास्थ्य के कारक हैं। जब कुंडली में सूर्य तुला राशि (नीच) में हों, राहु-केतु से ग्रस्त (ग्रहण दोष) हों या शनि से दृष्ट हों, तो व्यक्ति को अपयश, पिता से अनबन, नेत्र विकार, हृदय रोग व सरकारी कार्यों में असफलता मिलती है। वाल्मीकि रामायण में अगस्त्य मुनि ने भगवान राम को रावण विजय हेतु आदित्य हृदय स्तोत्र दिया था। उज्जैन में सूर्योदय काल में सूर्य शांति का विशेष महात्म्य है।
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के समस्त अंधकार, निराशा और शत्रु परास्त हो जाते हैं और जातक सूर्य के समान तेजस्वी बनता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
सरकारी नौकरी व पदोन्नति में सफलता, मान-सम्मान में वृद्धि, नेत्र व हृदय रोगों में राहत, पिता से मधुर संबंध।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. सूर्योदय काल में पवित्र स्नान व संकल्प
2. तांबे के कलश से 12 बार सूर्य अर्घ्यदान (रोली, लाल पुष्प, अक्षत व जल)
3. सूर्य यंत्र स्थापन एवं षोडशोपचार पूजन
4. आदित्य हृदय स्तोत्र के 21 आवर्तन पाठ
5. मदार (आक) की समिधा, लाल चंदन, गुड़ व घी से 108 आहुति हवन
6. तांबे का पात्र, गेहूं, गुड़ व लाल वस्त्र का दान
7. महाआरती एवं सूर्य नमस्कार
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: मदार की लकड़ी (अर्क समिधा), तांबे का पात्र, लाल चंदन, गुड़, गेहूं, लाल पुष्प, शुद्ध घी, रोली, अक्षत।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
मदार (आक) की समिधा, लाल चंदन, गुड़ एवं शुद्ध घृत से 108 आहुतियों का सूर्य शांति हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से रामघाट (शिप्रा तट) / उज्जैन आश्रम पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक रविवार, मकर संक्रांति, रथ सप्तमी। सूर्योदय काल 06:00 बजे से 08:30 बजे तक सर्वोत्तम।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण लेख
छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...
नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...