अखंड श्री सुंदरकांड पाठ एवं संकटमोचन यज्ञ: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
श्रीरामचरितमानस का पंचम सोपान "सुंदरकांड" केवल एक कथा नहीं, बल्कि संकटों को अवसरों में बदलने वाला महामंत्र है। इसमें हनुमान जी के समुद्र लांघने, लंका दहन, विभीषण शरणागति तथा सीता माता की खोज का वर्णन है। यह संपूर्ण रामचरितमानस का एकमात्र कांड है जिसके नायक स्वयं हनुमान जी हैं। सुंदरकांड के पाठ से घर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा, भूत-पिशाच बाधा, तनाव व निराशा समाप्त होती है तथा आत्मविश्वास का संचार होता है।
सुंदरकांड का पाठ करने से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव भी हनुमान जी की कृपा से निष्फल हो जाते हैं।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
विपत्ति व घोर संकट से मुक्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि, असाध्य कार्यों की सिद्धि, नकारात्मक शक्तियों का नाश।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. श्रीराम दरबार एवं हनुमान जी का आवाहन
2. हनुमान जी को चमेली के तेल व सिंदूर का चोला अर्पण
3. सस्वर संगीतमय सुंदरकांड का अखंड पाठ
4. हनुमान चालीसा एवं संकट मोचन हनुमानाष्टक पाठ
5. चूरमा, बेसन के लड्डू व तुलसी दल का महाभोग
6. 108 आहुति मारुति गायत्री हवन
7. सिंदूर तिलक, महाआरती एवं प्रसाद वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: चमेली का तेल, शुद्ध सिंदूर, तुलसी दल, बेसन के लड्डू, गेहूं का चूरमा, शुद्ध घी, आम की लकड़ी, धूप, कपूर, लाल लंगोट/वस्त्र।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
हनुमान बीज मंत्र एवं मारुति गायत्री से 108 आहुतियों का पावन संकटमोचन हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से घर पर अथवा उज्जैन हनुमान मंदिर / आश्रम पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, नवरात्रि। सायंकाल 04:00 बजे से 07:30 बजे अथवा प्रातःकाल।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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