श्री सूक्त एवं कनकधारा महालक्ष्मी अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
ऋग्वेद का खिलसूक्त "श्री सूक्त" ब्रह्मांड में धन, वैभव, कीर्ति और ऐश्वर्य का मूल स्रोत माना गया है। जब आदि शंकराचार्य ने एक दरिद्र ब्राह्मणी के घर केवल एक सूखे आंवले के दान से द्रवित होकर कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी, तो साक्षात माता महालक्ष्मी ने सुवर्ण आंवलों की वर्षा कर दी थी। इस अनुष्ठान में श्री यंत्र की प्राण-प्रतिष्ठा कर कमल के 108 पुष्पों, इत्र, खीर और कमलगट्टे से माता महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है। यह व्यापार में वृद्धि, कर्ज मुक्ति एवं स्थाई लक्ष्मी के वास का अचूक उपाय है।
विष्णु पुराण के अनुसार जिस घर में श्री सूक्त की ऋचाएं गूंजती हैं, वहां कभी दरिद्रता या अलक्ष्मी का प्रवेश नहीं हो सकता।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
व्यापार में लाभ, कर्ज व ऋण से मुक्ति, घर में स्थाई धन-धान्य का वास, दरिद्रता का नाश एवं ऐश्वर्य प्राप्ति।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. स्वस्तिवाचन एवं यजमान संकल्प
2. श्री यंत्र एवं महालक्ष्मी विग्रह की षोडशोपचार प्रतिष्ठा
3. केसर, पंचामृत एवं गुलाब जल से अभिषेक
4. 108 कमल पुष्पों द्वारा श्री सूक्त के 16 मंत्रों से अर्चन
5. आदि शंकराचार्य कृत कनकधारा स्तोत्र का पाठ
6. कमलगट्टा, मखाने, खीर व शुद्ध घी से दशांश हवन
7. महाआरती, लक्ष्मी चरणामृत एवं प्रसाद वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: 108 कमल पुष्प / गुलाब, कमलगट्टा, श्री यंत्र, मखाना, खीर, शुद्ध घी, लाल वस्त्र, केसर, इत्र, कौड़ी, गोमती चक्र।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
कमलगट्टा, मखाना, खीर एवं शुद्ध घृत से 108 आहुतियों का पावन महालक्ष्मी हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से घर / व्यापारिक प्रतिष्ठान / उज्जैन पीठ पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक शुक्रवार, धनतेरस, दीपावली, शरद पूर्णिमा, अक्षय तृतीया। सायंकाल (संध्या समय) अथवा प्रातः 07:00 से 10:30 बजे।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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