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श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं पंचामृत पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 29 अगस्त 2026 • 738 पाठक
श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं पंचामृत पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
स्कंद पुराणोक्त पांच अध्यायों की पावन कथा, शालिग्राम अभिषेक, पंजीरी-पंचामृत महाप्रसाद एवं हवन द्वारा घर में सुख, शांति व मंगल कामना। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

स्कंद पुराण के रेवा खंड में वर्णित भगवान श्री सत्यनारायण की कथा कलियुग में सबसे सरल एवं सर्वाधिक फलदायी मानी गई है। जब नारद जी ने भगवान विष्णु से कलियुग के जीवों के कष्ट निवारण का उपाय पूछा, तो भगवान ने स्वयं इस व्रत का उपदेश दिया। इसमें शालिग्राम भगवान का पंचामृत से अभिषेक, कलश स्थापन, केले के स्तंभों से मंडप निर्माण, भुने हुए गेहूं के आटे की पंजीरी (सपाद भक्ष्य) का महाभोग तथा पांच अध्यायों की कथा का श्रवण किया जाता है।

इस कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य के ज्ञात-अज्ञात पाप नष्ट होते हैं और घर में कलह की जगह प्रेम और ऐश्वर्य का संचार होता है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

गृह शांति, मनोकामना सिद्धि, व्यापार में बरकत, नूतन कार्य का शुभारंभ, विवाह व संतान उपरांत कृतज्ञता ज्ञापन।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । तथा ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. कलश एवं मंडप स्थापन
2. गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन
3. शालिग्राम/विष्णु भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं तुलसी अर्पण
4. स्कंद पुराणोक्त श्री सत्यनारायण के 5 अध्यायों की कथा वाचन
5. सपाद पंजीरी, पंचामृत एवं केले के फल का नैवेद्य अर्पण
6. संक्षिप्त विष्णु गायत्री दशांश हवन
7. महाआरती, चरणामृत एवं प्रसाद वितरण

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: शालिग्राम जी, तुलसी दल, केले के पत्ते, भुना हुआ गेहूं का आटा, शर्करा, शुद्ध घी, पंचमेवा, पंचामृत, रोली, मौली, कपूर।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

विष्णु गायत्री एवं पुरुष सूक्त से 108 आहुतियों का सात्विक हवन।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से घर पर अथवा उज्जैन आश्रम में पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक पूर्णिमा, एकादशी, संक्रांति, गुरुवार अथवा किसी भी शुभ मांगलिक अवसर पर। सायंकाल (संध्या समय) अथवा प्रातः 08:00 बजे से 12:00 बजे।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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