संतान गोपाल अनुष्ठान एवं पुत्रेष्टि याग: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
हिंदू धर्मशास्त्रों में संतान को वंश की निरंतरता और पितरों के उद्धार का माध्यम माना गया है। जब जन्मपत्रिका में पंचम भाव (संतान भाव), पंचमेश या गुरु ग्रह पीड़ित होते हैं अथवा पितृ दोष के कारण संतान उत्पत्ति में बाधा आती है, तो संतान गोपाल अनुष्ठान का विधान है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप (लड्डू गोपाल) का पंचामृत से अभिषेक कर शुद्ध माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है तथा वैदिक विद्वानों द्वारा संतान गोपाल मंत्र का सविधि जप संपन्न होता है।
हरिवंश पुराण में वर्णित राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ तथा देवकी-वासुदेव के कृष्ण प्राकट्य के समान यह अनुष्ठान संतान सुख प्रदान करने वाला है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
संतान प्राप्ति में अकारण विलंब, गर्भपात के दोषों की शांति, स्वस्थ व तेजस्वी संतान की प्राप्ति एवं सुरक्षित मातृत्व।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. दंपति संकल्प एवं प्रायश्चित पूजन
2. लड्डू गोपाल जी का पंचामृत, केसर व गंगाजल से अभिषेक
3. नूतन वस्त्र (पीतांबर) एवं मोरपंख मुकुट से शृंगार
4. वैदिक ब्राह्मणों द्वारा संतान गोपाल मंत्र (21,000 / 1,25,000) का सस्वर जप
5. ताजा माखन, मिश्री एवं तुलसी दल का भोग
6. पलाश एवं आम की समिधा, खीर व घृत से दशांश हवन
7. संतान गोपाल यंत्र रक्षाकवच दंपति को धारण कराना
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: लड्डू गोपाल विग्रह, ताजा सफेद मक्खन, मिश्री, गाय का दूध, तुलसी दल, पीला वस्त्र, केसर, शहद, शुद्ध घी, खीर, कमल गट्टा।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
खीर, गाय का घी, मदार एवं पलाश समिधा से 108 या 1008 आहुतियों का पुत्रेष्टि हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन आश्रम / सांदीपनि आश्रम क्षेत्र, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक गुरुवार, रोहिणी नक्षत्र, कृष्ण जन्माष्टमी, संतान सप्तमी, गुरु पुष्य योग। प्रातःकाल 06:30 बजे से 11:30 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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