संकट मोचन हनुमान अष्टक पाठ एवं मारुति अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
"को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो।" जब मनुष्य के जीवन में कोई संकट अत्यंत विकट रूप ले ले और चारों तरफ से रास्ते बंद नजर आएं, तब संकटमोचन हनुमानाष्टक का 108 बार पाठ संजीवनी का कार्य करता है। इसमें हनुमान जी द्वारा सुग्रीव का दुख हरने, लक्ष्मण के प्राण बचाने और माता सीता की खोज करने जैसे महान पराक्रमों का स्मरण कर उनसे प्रार्थना की जाती है। 108 आक के पत्तों पर श्री राम नाम लिखकर अर्पित करने से संकटों का त्वरित शमन होता है।
यह स्तोत्र संकटों के निवारण हेतु शास्त्रसम्मत सिद्ध प्रार्थना है। इसके प्रभाव से भयभीत मन को तुरंत ढांढस और संबल मिलता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
अचानक आए पारिवारिक या आर्थिक संकट से मुक्ति, असाध्य रोगों के भय का शमन, नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. पवित्रीकरण एवं यजमान संकल्प
2. हनुमान जी का पंचामृत स्नान व सिंदूर अर्पण
3. 108 आक (मदार) के पत्तों पर चंदन से 'श्रीराम' लिखकर माला अर्पण
4. 108 बार संकटमोचन हनुमानाष्टक का सस्वर पाठ
5. ताजी बूंदी अथवा बेसन के लड्डू का भोग
6. 108 आहुति मारुति हवन
7. महाआरती एवं प्रसाद वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: 108 आक/मदार के पत्ते, चमेली का तेल, शुद्ध सिंदूर, बूंदी, तुलसी दल, शुद्ध घी, आम की समिधा, मौली, कपूर।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
मारुति गायत्री मंत्र से 108 आहुतियों का संक्षिप्त हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन हनुमान आश्रम / घर पर पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक मंगलवार, शनिवार, संकट चतुर्थी। प्रातः 07:00 से 10:30 अथवा सायं 06:00 से 08:30।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण लेख
छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...
नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...