श्री राम नवमी जन्मोत्सव एवं रामायण सुंदरकांड पाठ: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का अवतार धर्म की पुनर्स्थापना और सज्जनों के कल्याण हेतु हुआ था। राम नवमी के पावन अवसर पर मध्याह्न काल में जब सूर्य अपने उच्च स्थान पर होता है, प्रभु का जन्मोत्सव, भयहरण स्तुति "भए प्रगट कृपाला", राम रक्षा स्तोत्र एवं हवन संपन्न होता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
पारिवारिक सुख, संतानों में सुसंस्कार, मर्यादा, विजय एवं शत्रु बाधाओं का शमन।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. यजमान संकल्प एवं स्वस्तिवाचन
2. राम दरबार (श्री राम, सीता जी, लक्ष्मण जी, हनुमान जी) का अभिषेक
3. मध्याह्न 12 बजे 'भए प्रगट कृपाला' स्तुति
4. श्री राम रक्षा स्तोत्र एवं नामावली पाठ
5. पंजीरी, पंचामृत व फल भोग अर्पण
6. राम जन्म आरती, पुष्पवर्षा एवं प्रसाद वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: गंगाजल, पंचामृत, पीला चंदन, तुलसी दल, कमल पुष्प, केसर, धनिया पंजीरी, पंचमेवा, इत्र एवं हवन सामग्री।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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