श्री राधा-कृष्ण प्रेम एवं वैवाहिक सौहार्द पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
श्री राधा-कृष्ण प्रेम, समर्पण और एकात्मता के साक्षात प्रतीक हैं। दांपत्य जीवन में तनाव, मतभेद अथवा संवादहीनता को दूर करने के लिए वैदिक परंपरा में युगल सरकार का सुगंधित द्रव्यों, ताजे पुष्पों एवं मधुराष्टक पाठ से पूजन करने का विधान है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
दांपत्य प्रेम में प्रगाढ़ता, वैवाहिक कलह व मनमुटाव की शांति, आकर्षण एवं सुखी गृहस्थ आश्रम।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. मंगलाचरण एवं युगल संकल्प
2. श्री राधा-कृष्ण का सुवासित जल से अभिषेक
3. दिव्य शृंगार एवं तुलसी-गुलाब पुष्प अर्पण
4. मधुराष्टक एवं युगल सहस्रनाम पाठ
5. माखन, मिश्री व खीर का सात्विक भोग
6. युगल आरती, पुष्पवर्षा एवं आशीर्वाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: गुलाब व गेंदे के ताजे पुष्प, तुलसी मंजरी, चंदन, गुलाब जल, इत्र, माखन, मिश्री, खीर, पीतांबर एवं श्रृंगार सामग्री।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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