पितृ दोष शांति एवं तर्पण पूजा: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
गरुड़ पुराण तथा मत्स्य पुराण में सिद्धवट उज्जैन को प्रयाग के वटवृक्ष और गया के वटवृक्ष के समान मोक्षदायिनी शक्ति वाला तीर्थ माना गया है। जब जातक की कुंडली में सूर्य या चंद्रमा पर राहु-केतु या शनि का अशुभ प्रभाव होता है अथवा पूर्वजों का विधिवत श्राद्ध न हुआ हो, तब पितृ दोष उत्पन्न होता है। इसके कारण वंश वृद्धि में रुकावट, संतान कष्ट, गृह क्लेश एवं अकारण रोग उत्पन्न होते हैं। सिद्धवट पर पिंडदान व तर्पण से तीन पीढ़ियों के पितृ तृप्त होते हैं।
मां शिप्रा के पावन तट पर स्थित सिद्धवट पर माता पार्वती ने तपस्या की थी तथा यहीं पर भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
संतान प्राप्ति में बाधा, वंश वृद्धि में रुकावट, परिवार में बार-बार अकाल मृत्यु का भय, अशांति एवं पैतृक ऋण से मुक्ति।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. शिप्रा तट पर कुशा स्नान एवं संकल्प
2. तिल, जौ एवं दुग्ध द्वारा देव-ऋषि-पितृ तर्पण
3. जौ के आटे, तिल एवं मधु से निर्मित 3 अथवा 7 पिंडों का दान
4. त्रिपिंडी श्राद्ध (सात्विक, राजसिक, तामसिक दोष निवारण)
5. भगवान जनार्दन एवं भगवान शिव का अभिषेक
6. गाय, श्वान, कौआ एवं चींटियों को पंचबलि भोग
7. ब्राह्मण भोजन संकल्प, दान-दक्षिणा एवं आशीर्वाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: जौ का आटा, काले तिल, कुशा घास, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, सफेद वस्त्र, तुलसी दल, दूध, पके चावल।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
पलाश एवं तिल से युक्त विशेष पितृ तर्पण हवन आहुतियां।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से सिद्धवट / रामघाट, शिप्रा तट, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: पितृ पक्ष (श्राद्ध), प्रत्येक मास की सर्वपितृ अमावस्या, सोमवती अमावस्या, पितृ मोक्ष चतुर्दशी। दोपहर 11:30 बजे से 02:30 बजे के मध्य (कुतुप एवं रौहिण मुहूर्त)।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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