Sacred Diya पारंपरिक वैदिक पूजा • प्रामाणिक ज्योतिष परामर्श • सम्पूर्ण दोष निवारण • उज्जैन तीर्थ
होम › ज्ञान केंद्र › पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महारुद्र पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
उज्जैन तीर्थ महात्म्य

पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महारुद्र पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 04 सितंबर 2026 • 627 पाठक
पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महारुद्र पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
पवित्र नदी की शुद्ध मृत्तिका (मिट्टी) से 1100 अथवा 108 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण, प्राण-प्रतिष्ठा, षोडशोपचार रुद्राभिषेक एवं विसर्जन। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

शिव महापुराण के विद्येश्वर संहिता में पार्थिव शिवलिंग पूजन की महिमा को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। "कलौ पार्थिव पूजनं प्रधानम्" अर्थात कलियुग में मिट्टी से बने शिवलिंग का पूजन सभी प्रकार के पापों का नाश कर मनोवांछित फल देने वाला है। पवित्र शिप्रा या गंगा की पावन मिट्टी, गोमूत्र, गाय के घी और भस्म मिलाकर शिवलिंगों का निर्माण किया जाता है। प्रत्येक शिवलिंग पर बिल्वपत्र, अक्षत व दुग्ध धारा से अभिषेक कर दशांश हवन किया जाता है।

भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व रामेश्वरम में तथा द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने पार्थिव शिवलिंग का पूजन कर विजय प्राप्त की थी।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

असाध्य मनोकामनाओं की पूर्ति, संकट मुक्ति, धन-संपत्ति लाभ, रोग निवारण एवं कलियुग के समस्त पापों का प्रायश्चित।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. पवित्र मृत्तिका संग्रहण एवं शोधन
2. वैदिक मंत्रों द्वारा पार्थिव शिवलिंगों (108 / 1100) का निर्माण
3. प्राण-प्रतिष्ठा एवं एकादश रुद्र आवाहन
4. पंचामृत, गंगाजल, चंदन एवं भस्म से अभिषेक
5. सहस्र बिल्वपत्र अर्पण एवं रुद्राष्टाध्यायी पाठ
6. 108 आहुति शिव पंचाक्षरी हवन
7. आरती, क्षमा याचना एवं पवित्र नदी में विसर्जन

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: पवित्र मिट्टी, गाय का दूध, घी, बेलपत्र (1100), धतूरा, भस्म, सफेद चंदन, अक्षत, शहद, गंगाजल, कर्पूर।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

बेलपत्र, तिल, घृत एवं शिव पंचाक्षर मंत्र से 108 आहुतियों का पावन हवन।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से रामघाट / महाकाल आश्रम, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: सावन मास, महाशिवरात्रि, प्रत्येक सोमवार, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि। प्रातः 06:00 बजे से दोपहर 11:30 बजे तक।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

अन्य महत्वपूर्ण लेख

छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...

नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...