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दोष विचार एवं समाधान

नारायण नागबलि एवं त्रिपिंडी श्राद्ध: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 08 सितंबर 2026 • 553 पाठक
नारायण नागबलि एवं त्रिपिंडी श्राद्ध: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
अतृप्त पूर्वजों की प्रेत योनि से मुक्ति, अकाल मृत्यु जनित दोषों तथा वंश में संतान बाधा निवारण हेतु उज्जैन सिद्धवट पर संपन्न होने वाला 3-दिवसीय महाअनुष्ठान। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

गरुड़ पुराण एवं धर्मसिंधु में नारायण नागबलि को सबसे बड़ा पितृ उद्धारक अनुष्ठान माना गया है। यदि परिवार में किसी पूर्वज की अकाल मृत्यु (दुर्घटना, विष, जल, अग्नि अथवा आत्महत्या) हुई हो, तो उनकी आत्मा अतृप्त रहकर वंशजों को पीड़ा देती है। नारायण बलि से प्रेत बाधा व अतृप्त आत्मा को सद्गति मिलती है तथा नागबलि से सर्प हत्या जनित दोष समाप्त होता है। उज्जैन के सिद्धवट (अक्षय वट) पर यह अनुष्ठान अत्यंत फलदायी माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार इस अनुष्ठान में भगवान श्री नारायण की स्वर्ण प्रतिमा की साक्षी में संपूर्ण प्रायश्चित विधान, पिंड दान एवं दशगात्र संपन्न होता है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

अतृप्त पूर्वजों को मोक्ष, परिवार में बार-बार गर्भपात व संतानहीनता की समाप्ति, अज्ञात भय व अशांति से मुक्ति।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । तथा ॐ पितृभ्यो नमः स्वधा नमः ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

प्रथम दिवस: शिप्रा स्नान, प्रायश्चित संकल्प, नारायण बलि, 16 पिंड दान एवं विष्णु पूजन
द्वितीय दिवस: नागबलि विधान, आटे के सर्प की प्राण-प्रतिष्ठा, दाह संस्कार, तर्पण एवं दशांश हवन
तृतीय दिवस: त्रिपिंडी श्राद्ध, 3 पिंडों का दान (ब्रह्मा, विष्णु, महेश निमित्त), ब्राह्मण भोजन एवं दान-दक्षिणा

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: जौ का आटा, काले तिल, कुशा, शुद्ध घी, शहद, गंगाजल, सफेद धोती, सोने/चांदी की छोटी प्रतिमा, पंचामृत।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

पलाश एवं तिल से युक्त नारायण बलि व नागबलि के दो अलग-अलग विशेष अग्निहोत्र।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से सिद्धवट तीर्थ, शिप्रा तट, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: पितृ पक्ष (श्राद्ध), प्रत्येक माह की अमावस्या, पंचक रहित शुभ तिथियां। प्रातः 08:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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