वैदिक नामकरण एवं मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
सनातन धर्म के 16 संस्कारों में नामकरण (पाँचवाँ) और मुंडन/चौल (आठवाँ) संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। नामकरण संस्कार में शिशु के जन्म नक्षत्र, चरण और राशि के आधार पर गुप्त व व्यावहारिक नाम का निर्धारण किया जाता है तथा पिता शिशु के दाहिने कान में उस नाम का उच्चारण करते हैं। मुंडन संस्कार में माता के गर्भ से आए अशुद्ध केशों का त्याग कर शिशु को पवित्र किया जाता है। उज्जैन के रामघाट या सिद्धवट तीर्थ पर यह संस्कार कराने से बालक की बुद्धि प्रखर, स्वास्थ्य सुदृढ़ और आयु दीर्घ होती है।
सुश्रुत संहिता और चरक संहिता के अनुसार मुंडन कराने से सिर की तंत्रिकाओं को नई ऊर्जा मिलती है, दृष्टि तेज होती है और सिर का ताप संतुलित रहता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
शिशु का बौद्धिक विकास, गर्भ दोषों की शुद्धि, दीर्घायु, नजर दोष से रक्षा एवं कुलदेवता का शुभाशीर्वाद।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. स्वस्तिवाचन एवं मातृका पूजन
2. कुलदेवता, नवग्रह एवं अग्नि स्थापन
3. नामकरण: नक्षत्र चरण अनुसार गुप्त व व्यावहारिक नाम का निर्धारण, पिता द्वारा कान में नामोच्चार
4. मुंडन: नाई द्वारा शास्त्रसम्मत रीति से प्रथम केश कर्तन, गाय के गोबर/दूध से सिर का लेपन
5. कटे हुए केशों का पवित्र शिप्रा नदी में विसर्जन
6. आयुष सूक्त एवं मेधा सूक्त से 108 आहुति हवन
7. बालक को नवीन वस्त्र, महाआरती एवं कुलदेवता आशीर्वाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: शिशु के नए वस्त्र, हल्दी, गाय का दूध, रोली, अक्षत, कलावा, शुद्ध घी, आम की समिधा, दही, गंगाजल, पंचामृत।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
आयुष सूक्त एवं गायत्री मंत्र से 108 आहुतियों का दीर्घायु व मेधा हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से रामघाट / सिद्धवट तीर्थ / घर / उज्जैन आश्रम पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: जन्म के 11वें या 21वें दिन (नामकरण हेतु) तथा प्रथम, तीसरे या पाँचवें वर्ष में (मुंडन हेतु)। प्रातः 07:30 बजे से 11:30 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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