उज्जैन के पवित्र मंगलनाथ मंदिर का इतिहास एवं भात पूजा का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक रहस्य
विश्व के प्राचीनतम खगोलीय और आध्यात्मिक केंद्रों में अवंतिका (उज्जैन) का स्थान सर्वोच्च है। सूर्य सिद्धांत और वराहमिहिर के ज्योतिषीय ग्रंथों में उज्जैन को शून्य अक्षांश (Prime Meridian) के समान आदर दिया गया है।
मंगलनाथ: पृथ्वी की नाभि और मंगल का जन्म स्थल
पौराणिक आख्यानों के अनुसार, अंधकासुर दैत्य के संहार के समय भगवान शिव के पसीने की एक बूंद जब इस पावन धरा पर गिरी, तो उससे रक्तांग भगवान भौम (मंगल देव) का प्राकट्य हुआ। यही स्थान आज मंगलनाथ तीर्थ के रूप में विश्वविख्यात है।
भात पूजा का प्रतीकात्मक महत्त्व
मंगल ग्रह को अग्नि तत्व और उग्रता का प्रतीक माना जाता है। पके हुए चावल (भात) को शीतलता और पोषण का प्रतीक माना गया है। जब भगवान शिवलिंग पर भात का लेपन किया जाता है, तो यह साधक के भीतर के क्रोध, उत्तेजना और मानसिक तनाव को शांत करने की वैदिक प्रार्थना का रूप लेता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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