मंगला गौरी व्रत एवं अखंड सौभाग्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
श्रावण मास के मंगलवार को मां मंगला गौरी का पूजन नवविवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। विवाह के प्रथम 5 वर्षों तक यह व्रत रखकर तत्पश्चात इसका शास्त्रीय उद्यापन किया जाता है। इसमें 16 प्रकार के फल, 16 श्रृंगार सामग्री एवं 16 आटे के दीपकों से आरती का विशेष विधान है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु, मंगल दोष का शमन एवं परिवार में निरंतर सुख-शांति।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. मंगला गौरी प्रतिमा स्थापन व संकल्प
2. 16 सुहाग द्रव्यों से मां गौरी का शृंगार
3. मंगला गौरी व्रत कथा श्रवण
4. 16 आटे के दीपकों से विशेष महाआरती
5. सुहागिनों को 16-16 सुहाग पिटारी भेंट
6. उद्यापन हवन, क्षमा याचना एवं आशीर्वाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: 16 सुहाग सामग्री (सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी आदि), 16 आटे के दीपक, 16 सुपारी, 16 फल, 16 पान के पत्ते, पंचामृत एवं लाल चुनरी।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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