महामृत्युंजय अनुष्ठान एवं जप: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
ऋग्वेद एवं यजुर्वेद में महामृत्युंजय मंत्र को मृत-संजीवनी विद्या की संज्ञा दी गई है। ऋषि मार्कंडेय ने इसी मंत्र के प्रभाव से यमराज पर विजय प्राप्त की थी। उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर काल के भी काल हैं। यहां संपन्न किया गया महामृत्युंजय अनुष्ठान जातक को शारीरिक व्याधियों, शल्य-चिकित्सा (सर्जरी) के भय, दुर्घटनाओं एवं मानसिक विषाद से दिव्य सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
शिव महापुराण के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख (1,25,000) जप तथा दशांश हवन करने से जातक सभी प्रकार के अकाल भय से मुक्त हो जाता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
असाध्य रोगों से मुक्ति, दीर्घायु, गंभीर दुर्घटनाओं से रक्षा, आईसीयू/अस्पताल संकट में स्वास्थ्य लाभ एवं मानसिक शांति।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. प्रायश्चित संकल्प एवं गुरु-गणेश पूजन
2. पार्थिव शिवलिंग अथवा नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापना
3. प्राण-प्रतिष्ठा एवं अंगन्यास-करन्यास
4. योग्य ब्राह्मणों द्वारा संकल्पित संख्या (21,000 / 1,25,000) में मंत्र जप
5. नित्य दूध, गिलोय एवं दुर्वा से महामृत्युंजय संपुटित अभिषेक
6. दशांश समिधा, घृत, गुग्गल, खीर एवं औषधीय जड़ी-बूटियों से हवन
7. पूर्णाहुति, वसोर्धारा, भस्म धारण एवं रक्षासूत्र बंधन
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: शुद्ध देशी घी, गिलोय (अमृता), दुर्वा, बेलपत्र, सफेद चंदन, काले तिल, शहद, गाय का कच्चा दूध, गुग्गल, कर्पूर, जटामांसी।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
औषधीय समिधा, गिलोय के 108 टुकड़े, खीर एवं शुद्ध घृत से दशांश हवन संपन्न होता है।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से महाकालेश्वर तीर्थ क्षेत्र / वैदिक आश्रम, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: महाशिवरात्रि, सावन मास, प्रत्येक सोमवार, प्रदोष काल एवं जातक के जन्मदिन अथवा संकट काल में कभी भी। ब्रह्म मुहूर्त अथवा प्रातः 06:00 बजे से आरंभ।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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