लघुरुद्र एवं एकादश रुद्र महाभिषेक: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
यजुर्वेद की रुद्राष्टाध्यायी के 11 आवर्तनों से एक रूद्री बनती है। 11 रूद्री (121 पाठ) मिलकर एक "लघुरुद्र" का निर्माण करते हैं। यह वैदिक कर्मकांड का सर्वोच्च अनुष्ठान माना गया है, जिसमें 11 वेदपाठी ब्राह्मण एक साथ निरंतर मंत्रोच्चार करते हुए शिवलिंग पर पंचामृत और औषधीय द्रव्यों की धारा प्रवाहित करते हैं। इसके प्रभाव से राष्ट्र, समाज एवं यजमान के समस्त ग्रह दोष, वास्तु दोष और संचित पाप भस्म हो जाते हैं।
रुद्रयामल तंत्र के अनुसार लघुरुद्र अनुष्ठान से साक्षात शिव कृपा का प्राकट्य होता है। उज्जैन महाकाल की धरा पर इसका प्रभाव अद्वितीय है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
समस्त ग्रह दोषों का शमन, राजनीति व व्यापार में महाविजय, कुल रक्षा, असाध्य बाधाओं का समूल नाश।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. गणपति, मातृका, नांदी श्राद्ध एवं संकल्प
2. एकादश रुद्र कलश स्थापना एवं पूजन
3. 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्राष्टाध्यायी के 121 आवर्तनों का सस्वर पाठ
4. निरंतर पंचामृत, औषधीय रस व गंगाजल की धारा
5. एकादश रुद्र हवन (1331 आहुतियां)
6. वसोर्धारा, स्विष्टकृत होम, पूर्णाहुति
7. महाआरती, भस्म धारण एवं 11 ब्राह्मण दक्षिणा व आशीर्वाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: शुद्ध देशी घी (15 किग्रा), 11 कलश, 1008 बेलपत्र, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), गिलोय, गुग्गल, हवन समिधा।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
1331 आहुतियों का शास्त्रीय लघुरुद्र हवन समिधा, घृत, खीर एवं जड़ी-बूटियों से संपन्न होता है।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से महाकाल तीर्थ / वैदिक आश्रम, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: सावन मास, महाशिवरात्रि, कार्तिक पूर्णिमा, शुभ मुहूर्त। प्रातः 07:00 बजे से अपराह्न 02:00 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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