कुंभ विवाह एवं अर्क विवाह दोष निवारण अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कन्या की कुंडली में उग्र मांगलिक दोष, वैधव्य योग या विषम ग्रह स्थितियां हों, तो उसका विवाह पहले भगवान विष्णु के प्रतीक "मिट्टी के कुंभ (कलश)" अथवा पीपल/शालिग्राम से कराया जाता है, जिसे "कुंभ विवाह" कहते हैं। इसके बाद वह कुंभ विसर्जित कर दिया जाता है, जिससे दोष कुंभ पर चला जाता है। इसी प्रकार जब वर की कुंडली में द्वि-विवाह योग या मांगलिक दोष हो, तो उसका विवाह "अर्क (मदार) के पौधे" से कराया जाता है, जिसे "अर्क विवाह" कहते हैं। उज्जैन मंगलनाथ तीर्थ पर यह अनुष्ठान अत्यंत प्रामाणिक विधि से संपन्न होता है।
मुहूर्त चिंतामणि एवं निर्णय सिंधु में इस संस्कार का विशद वर्णन है। इसे संपन्न करने के बाद जातक सामान्य व्यक्ति से निर्दोष भाव से विवाह कर सकता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
मांगलिक दोष का स्थायी शमन, वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी की दीर्घायु, तलाक व कलह से रक्षा, विवाह में आ रहे विलंब का निवारण।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. पवित्रीकरण, स्वस्तिवाचन एवं कन्या/वर संकल्प
2. कुंभ (कलश) अथवा अर्क वृक्ष में भगवान विष्णु की प्राण-प्रतिष्ठा
3. हल्दी, मेहंदी एवं विवाह मंडप संस्कार
4. सप्तपदी, फेरे (प्रदक्षिणा), पाणिग्रहण एवं सिंदूर दान (शास्त्रीय विवाह विधि)
5. मंगल शांति एवं नवग्रह दशांश हवन
6. कुंभ का ससम्मान पवित्र नदी (शिप्रा) में विसर्जन
7. ब्राह्मण आशीर्वाद एवं रक्षा सूत्र
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: सुसज्जित मिट्टी का कुंभ (घड़ा) अथवा अर्क का पौधा, वर-वधू वस्त्र, रोली, मौली, सिंदूर, हल्दी, मंगल सूत्र, शुद्ध घी, हवन समिधा।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
मंगल ग्रह तथा नवग्रहों के मंत्रों से 108 आहुतियों का पावन विवाह शांति हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से मंगलनाथ मंदिर क्षेत्र / उज्जैन आश्रम पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: शुभ विवाह मुहूर्त, मंगलवार, शनिवार, शुक्ल पक्ष की शुभ तिथियां। प्रातःकाल शुभ लग्न में।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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