Sacred Diya पारंपरिक वैदिक पूजा • प्रामाणिक ज्योतिष परामर्श • सम्पूर्ण दोष निवारण • उज्जैन तीर्थ
होम › ज्ञान केंद्र › करवा चौथ व्रत एवं चंद्र अर्घ्य दांपत्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
ज्योतिष एवं मुहूर्त

करवा चौथ व्रत एवं चंद्र अर्घ्य दांपत्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 14 सितंबर 2026 • 777 पाठक
करवा चौथ व्रत एवं चंद्र अर्घ्य दांपत्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को सुहागिनों द्वारा निर्जला व्रत, करवे से पूजन, वीरावती कथा श्रवण एवं चंद्र दर्शन उपरांत छलनी से अर्घ्य। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

करवा चौथ सुहागिन महिलाओं का सर्वाधिक प्रतीक्षित पावन पर्व है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। सायं काल में मिट्टी के करवे से मां गौरी का पूजन कर कथा सुनी जाती है और रात्रि में चंद्रोदय पर छलनी से चंद्रमा व पति का दर्शन कर जल ग्रहण किया जाता है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

पति की दीर्घायु, जीवन में कभी वैधव्य न आने का आशीर्वाद, प्रेम में प्रगाढ़ता एवं दांपत्य सुख।

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. प्रातः सरगी ग्रहण व निर्जला संकल्प
2. सायं काल मिट्टी के करवे में जल व सींकों की स्थापना
3. मां गौरी व शिव जी का षोडशोपचार पूजन
4. करवा चौथ एवं वीरावती की पावन कथा श्रवण
5. रात्रि चंद्रोदय पर चांदी/तांबे के पात्र से चंद्र देव को अर्घ्य
6. छलनी से चंद्र व पति दर्शन, पति के हाथ से जल ग्रहण

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: मिट्टी का टोंटीदार करवा, छलनी, कांसे का लोटा, रोली, अक्षत, गेहूं के दाने, धूप-दीप, सुहाग पिटारी, मिठाई एवं फल।।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

अन्य महत्वपूर्ण लेख

छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...

नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...