भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) पूजन एवं शत्रु विजय अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
भगवान शिव एवं माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) देवताओं के सेनापति हैं। वे अदम्य साहस, शौर्य और शक्ति के अधिष्ठाता हैं। मंगल ग्रह के अधिदेवता भी कार्तिकेय हैं। स्कंद षष्ठी अथवा मंगलवार को उनका पूजन करने से भूमि विवाद, अनैतिक शत्रु बाधाएं और रक्त विकार समाप्त होते हैं।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
शत्रुओं पर विजय, अकारण भय का नाश, संपत्ति व भूमि विवादों में सफलता एवं मंगल दोष शांति।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. स्वस्तिवाचन एवं यजमान गोत्र संकल्प
2. कार्तिकेय विग्रह का पंचामृत व भस्म अभिषेक
3. लाल कनेर, लाल चंदन व सिंदूर से अर्चन
4. स्कंद षष्ठी स्तोत्र एवं सुब्रह्मण्य अष्टक पाठ
5. गुड़, अनार व मीठे रोट का नैवेद्य
6. शक्ति अस्त्र दीपदान, आरती एवं रक्षासूत्र
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: लाल कनेर के पुष्प, लाल चंदन, सिंदूर, लाल वस्त्र, गुड़, अनार, नारियल, गाय का घी, भस्म एवं दक्षिणा।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण लेख
छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...
नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...