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वैदिक पूजा विधि

वैदिक कर्णवेध संस्कार एवं स्वास्थ्य रक्षा पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 10 सितंबर 2026 • 851 पाठक
वैदिक कर्णवेध संस्कार एवं स्वास्थ्य रक्षा पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
शिशु की बौद्धिक क्षमता, नेत्र ज्योति एवं स्वास्थ्य रक्षा हेतु शुभ नक्षत्र में वैदिक मंत्रोच्चार पूर्वक शास्त्रसम्मत कर्णवेध संस्कार। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

कर्णवेध संस्कार सनातन धर्म का 9वां मुख्य संस्कार है। आयुर्वेद और सुश्रुत संहिता के अनुसार कान की विशेष नस के वेधन से मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध संतुलित होते हैं, हार्निया व आंत्रवृद्धि जैसे रोगों से बचाव होता है तथा स्मरण शक्ति तीव्र होती है। यह कार्य शुभ दिन स्वर्ण या चांदी की शलाका से किया जाता है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

नेत्र ज्योति की रक्षा, मानसिक एकाग्रता, आंत्र विकारों से सुरक्षा एवं वैदिक संस्कारों की पूर्णता।

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. मंगलाचरण एवं बालक का गोत्र संकल्प
2. सूर्य, वरुण एवं अश्विनी कुमारों का पूजन
3. बालक के कानों पर हल्दी-चंदन लेपन
4. वैदिक मंत्रों सहित प्रथम दाएं कान (पुत्र) अथवा बाएं कान (पुत्री) का वेध
5. स्वर्ण/चांदी की तार अथवा कुंडल धारण
6. नजर रक्षा तिलक एवं ब्राह्मण आशीर्वाद

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: स्वर्ण अथवा चांदी की शलाका/कुंडल, शुद्ध हल्दी, नारियल, कलावा, रोली, अक्षत, मिष्ठान एवं ब्राह्मण दक्षिणा।।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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