श्री कालभैरव एवं बटुक भैरव रक्षा शांति पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
उज्जैन नगरी के सेनापति एवं क्षेत्रपाल भगवान कालभैरव हैं। स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में कालभैरव दर्शन व पूजन की विशेष महिमा वर्णित है। हमारे द्वारा पूर्णतया सात्विक, वेदोक्त एवं शास्त्रसम्मत रीति से भैरव अष्टक पाठ, सरसों के तेल का दीपक, काला तिल, उड़द एवं सिंदूर अर्पण कर रक्षा अनुष्ठान कराया जाता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
अकारण भय, नकारात्मकता, कोर्ट कचहरी के विवाद, नजर दोष एवं गुप्त शत्रुओं से रक्षा।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. क्षेत्रपाल भैरव आवाहन एवं संकल्प
2. तेल, सिंदूर व अष्टगंध अर्चन
3. श्री कालभैरव अष्टक एवं बटुक भैरव स्तोत्र पाठ
4. 8 दिशाओं में सरसों तेल के दीप प्रज्वलन
5. उड़द एवं इमरती नैवेद्य अर्पण
6. रक्षा कवच सूत्र धारण एवं भस्म तिलक
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: शुद्ध सरसों का तेल, मिट्टी के 8 दीपक, काले उड़द, काले तिल, सिंदूर, गुग्गल, लौंग, जायफल, इमरती एवं नारियल।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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