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श्री कृष्ण जन्माष्टमी पंचामृत अभिषेक एवं शृंगार पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 04 जुलाई 2026 • 923 पाठक
श्री कृष्ण जन्माष्टमी पंचामृत अभिषेक एवं शृंगार पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की पावन मध्यरात्रि में बाल गोपाल का शंखोदक, पंचामृत स्नान, तुलसी अर्चन, माखन-मिश्री भोग एवं झूला उत्सव। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य उत्सव भाद्रपद अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन शंख में गंगाजल व पंचामृत भरकर बाल मुकुंद का अभिषेक करने से घर में खुशहाली, संतान सुख एवं प्रेम की वृद्धि होती है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

संतान प्राप्ति, पारिवारिक सौहार्द, मानसिक आनंद एवं भगवान श्री कृष्ण की निष्काम भक्ति।

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. गणेश-गौरी व नवग्रह स्मरण
2. दक्षिणावर्ती शंख से गंगाजल अभिषेक
3. पंचामृत (दुग्ध, दधि, घृत, मधु, शर्करा) स्नान
4. नवीन पीत वस्त्र, मोरमुकुट व बांसुरी शृंगार
5. माखन-मिश्री, पंजीरी व 56 भोग अर्पण
6. झूला झुलाना, मंगल आरती एवं महाप्रसाद

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: दक्षिणावर्ती शंख, गाय का दूध, दही, शहद, घी, मिश्री, माखन, तुलसी पत्र, मोरपंख, चंदन, इत्र, धनिया पंजीरी एवं मौसमी फल।।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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