गुरु चांडाल दोष निवारण पूजा: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, विवेक, धर्म, उच्च शिक्षा, संतान एवं वैवाहिक सुख के स्वामी हैं। जब गुरु के साथ राहु की युति होती है, तो इसे गुरु चांडाल योग कहा जाता है। इससे गुरु की सात्विक ऊर्जा दूषित हो जाती है, जिससे जातक गलत संगत में पड़ सकता है, उच्च शिक्षा में बाधा आती है, निर्णय क्षमता कमजोर होती है तथा समाज में अपयश का सामना करना पड़ता है। उज्जैन में भगवान विष्णु एवं देवगुरु की विशेष पीतांबर पूजा से राहु का कुप्रभाव समाप्त होता है।
फलदीपिका एवं जातक पारिजात में गुरु चांडाल शांति के लिए पीत पुष्प, स्वर्ण/पीतल तथा पीपल समिधा से हवन करने का स्पष्ट निर्देश है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
उच्च शिक्षा में सफलता, सही निर्णय क्षमता, समाज में मान-सम्मान की पुनर्स्थापना, संतान सुख एवं गुरु कृपा प्राप्ति।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. यजमान संकल्प एवं स्वस्तिवाचन
2. गुरु-राहु मंडल स्थापन एवं पूजन
3. देवगुरु बृहस्पति का केसर, हल्दी एवं पंचामृत से अभिषेक
4. पीले पुष्प, चने की दाल, गुड़ एवं पीतांबर वस्त्र अर्पण
5. गुरु एवं राहु के 1008-1008 मंत्रों का वैदिक जप
6. पीपल एवं दूर्वा की समिधा से दशांश हवन
7. पीली वस्तुओं का दान, गुरु वंदना एवं महाआरती
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: चने की दाल, हल्दी की गांठें, पीला वस्त्र, केसर, शहद, शुद्ध घी, पीपल की समिधा, दूर्वा, काले तिल, पंचामृत।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष की समिधा एवं पीले सरसों से 108 आहुतियों का पावन हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन आश्रम / रामघाट तीर्थ, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक गुरुवार, गुरु पुष्य योग, पूर्णिमा। प्रातः 07:00 बजे से 11:30 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण लेख
छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...
नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...