गणेश चतुर्थी प्राण-प्रतिष्ठा एवं मोदक महापूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
गणेश चतुर्थी भगवान सिद्धि विनायक का मुख्य प्राकट्य पर्व है। इस दिन घर अथवा व्यापार स्थल पर मिट्टी के श्री गणेश की प्राण-प्रतिष्ठा कर 10 दिनों तक सेवा करने का विधान है। 21 दूर्वा दल और 21 मोदक अर्पण करने से जीवन की समस्त रुकावटें समाप्त होती हैं।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
समस्त कार्यों में निर्विघ्नता, व्यापारिक सफलता, बुद्धि विवेक की वृद्धि एवं पारिवारिक खुशहाली।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. कलश स्थापन एवं भूमि पूजन
2. श्री गणेश विग्रह की वैदिक प्राण-प्रतिष्ठा
3. षोडशोपचार पूजन व सिंदूर लेपन
4. 21 दूर्वा दलों द्वारा अथर्वशीर्ष अर्चन
5. 21 मोदक एवं पंचमेवा भोग अर्पण
6. गणेश महाआरती, पुष्पांजलि एवं प्रसाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: मिट्टी के गणेश जी, 21 दूर्वा, 21 मोदक, लाल चंदन, लाल वस्त्र, जनेऊ, सुपारी, रोली, अक्षत, सिंदूर, इत्र एवं मोदक भोग।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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