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गणपति अथर्वशीर्ष सहस्रावर्तन एवं मोदक महायज्ञ: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 30 जुलाई 2026 • 441 पाठक
गणपति अथर्वशीर्ष सहस्रावर्तन एवं मोदक महायज्ञ: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
अथर्ववेदीय गणपति उपनिषद के 1008 आवर्तन पाठ, 1008 मोदक व दूर्वा से महायज्ञ द्वारा समस्त विघ्नों, वास्तु दोषों व कर्ज का समूल नाश। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

अथर्ववेद का "गणपति अथर्वशीर्ष" भगवान गणेश का साक्षात उपनिषद स्वरूप है। इसमें भगवान गणेश को ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इंद्र, अग्नि, वायु और संपूर्ण ब्रह्मांड का मूल तत्व निरूपित किया गया है। "यो मोदकसहस्रेण यजति स वाञ्छितफलमवाप्नोति।" अर्थात जो 1000 मोदकों से गणपति का हवन करता है, वह संसार में जो चाहे वह प्राप्त कर लेता है। उज्जैन के चिंतामण गणेश एवं बड़े गणेश जी के पावन क्षेत्र में यह अनुष्ठान सभी प्रकार के विघ्नों का नाश कर देता है।

गणपति अथर्वशीर्ष के आवर्तन से जातक के सभी नौ ग्रह अनुकूल हो जाते हैं तथा कुंडली का केतु दोष शांत होता है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

किसी भी नए कार्य, व्यापार या भवन निर्माण में आने वाले विघ्नों का नाश, कर्ज से मुक्ति, रिद्धि-सिद्धि व बुद्धि की प्राप्ति।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

ॐ गं गणपतये नमः । तथा त्वमेव केवलं कर्ताऽसि । त्वमेव केवलं धर्ताऽसि । त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. स्वस्तिवाचन एवं यजमान संकल्प
2. गणेश जी का पंचामृत, गन्ने के रस व सुगंधित जल से अभिषेक
3. 1008 दूर्वा दलों से सहस्रार्चन
4. वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा अथर्वशीर्ष के 108 अथवा 1008 आवर्तन पाठ
5. 108 अथवा 1008 मोदक, दूर्वा, तिल व शुद्ध घी से महाहवन
6. सिंदूर, लाल कनेर पुष्प एवं मोदक महाभोग
7. महाआरती एवं विघ्ननाशक रक्षा सूत्र

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: 1008 दूर्वा दल, 108 मोदक/लड्डू, लाल पुष्प, शुद्ध सिंदूर, गन्ने का रस, शुद्ध घी, काले तिल, आम की समिधा, पंचामृत।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

मोदक, शुद्ध घी, दूर्वा एवं काले तिल से 108 या 1008 आहुतियों का विशिष्ट अथर्वशीर्ष हवन।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से चिंतामण गणेश क्षेत्र / घर / उज्जैन पीठ पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, प्रत्येक बुधवार, नूतन वर्ष, गृह निर्माण शुभारंभ। प्रातः 07:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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