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श्री दुर्गा सप्तशती संपूर्ण संपुट पाठ अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 13 अगस्त 2026 • 183 पाठक
श्री दुर्गा सप्तशती संपूर्ण संपुट पाठ अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
मार्कंडेय पुराणोक्त 700 श्लोकों के 13 अध्यायों का विशिष्ट सिद्ध संपुट मंत्रों सहित सस्वर पाठ, कन्या पूजन एवं दशांश दुर्गा हवन। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत "दुर्गा सप्तशती" (देवी माहात्म्य) शक्ति उपासना का सर्वोच्च ग्रंथ है। इसमें मधु-कैटभ वध (महाकाली चरित्र), महिषासुर मर्दिनी (महालक्ष्मी चरित्र) तथा शुंभ-निशुंभ संहार (महासरस्वती चरित्र) के 700 दिव्य श्लोक हैं। संपुट पाठ में प्रत्येक श्लोक के आदि और अंत में जातक की विशेष मनोकामना (जैसे रोग निवारण, शत्रु बाधा, लक्ष्मी प्राप्ति, संतान रक्षा) से संबंधित सिद्ध मंत्र का संपुट लगाया जाता है। उज्जैन की पावन शक्तिपीठ हरसिद्धि और गढ़कालिका के सानिध्य में यह अनुष्ठान अमोघ फल देता है।

सप्तशती के 12वें अध्याय में देवी स्वयं कहती हैं कि जहां मेरा यह माहात्म्य एकाग्रचित्त से सुना जाता है, वहां कभी महामारी, दरिद्रता या उत्पात नहीं हो सकता।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

समस्त विपत्तियों व संकटों का समूल नाश, अकारण भय व शत्रु बाधा की शांति, घर में लक्ष्मी व ऐश्वर्य की वृद्धि, रोग मुक्ति।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. कलश स्थापन, अखंड ज्योति एवं दुर्गा चौकी निर्माण
2. कवच, अर्गला, कीलक एवं नवाक्षर मंत्र जप
3. 13 अध्यायों का संपूर्ण संपुटित पाठ (योग्य विद्वानों द्वारा)
4. देवी को लाल चुनरी, शृंगार सामग्री, कमल पुष्प व हलवा-पूरी भोग
5. दशांश चंडी हवन (दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से आहुतियां)
6. 9 कुंवारी कन्याओं का पाद प्रक्षालन, पूजन एवं भोजन
7. क्षमा प्रार्थना, महाआरती एवं रक्षासूत्र

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: लाल चुनरी, सोलह शृंगार सामग्री, कमल पुष्प, लाल गुलाब, शुद्ध घी, हलवा-चना भोग, जौ, तिल, गुग्गल, हवन समिधा।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

सप्तशती के 700 मंत्रों तथा सिद्ध नवाक्षर मंत्र से दशांश चंडी हवन संपन्न होता है।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से हरसिद्धि शक्तिपीठ क्षेत्र / आश्रम, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि, प्रत्येक माह की अष्टमी व चतुर्दशी। प्रातः 07:00 बजे से 12:30 बजे तक।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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