दीपावली महालक्ष्मी, कुबेर एवं बहीखाता महापूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
दीपावली सनातन संस्कृति का महानतम प्रकाश पर्व है। इस रात्रि में स्थिर लग्न (वृषभ/सिंह) में महालक्ष्मी का पूजन करने से घर एवं प्रतिष्ठान में लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है। हमारे द्वारा कनकधारा स्तोत्र, श्री सूक्त एवं कुबेर यंत्र के वैदिक मंत्रों द्वारा संपूर्ण विधि संपन्न कराई जाती है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
स्थिर लक्ष्मी वास, व्यापारिक ऋणों से मुक्ति, व्यावसायिक समृद्धि एवं तिजोरी की बरकत।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. स्वस्तिवाचन एवं यजमान गोत्र संकल्प
2. गणेश, लक्ष्मी व कुबेर देव का षोडशोपचार पूजन
3. श्री सूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र पाठ
4. नवीन बहीखाता/कलम/लैपटॉप पूजन
5. कौड़ी, गोमती चक्र व कमलगट्टे पर अर्चन
6. 21 दीपक प्रज्वलन, महालक्ष्मी महाआरती एवं महाप्रसाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: कमल पुष्प, 5 पीली कौड़ी, 5 गोमती चक्र, कमल गट्टे की माला, श्री यंत्र, चांदी का सिक्का, खील-बताशे, इत्र, अनार फल एवं शुद्ध घृत।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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