भूमि पूजन एवं शिलान्यास वैदिक संस्कार: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
वास्तु शास्त्र एवं मत्स्य पुराण के अनुसार धरती माता समस्त चराचर जगत का आधार हैं और शेषनाग ने पृथ्वी को अपने मस्तक पर धारण कर रखा है। जब भवन या कारखाने के निर्माण हेतु भूमि का खनन किया जाता है, तो भूदेवी और उस भूमि पर रहने वाले सूक्ष्म जीवों से क्षमा-याचना कर उनकी अनुमति लेना अनिवार्य है। भूमि पूजन के अंतर्गत ईशान कोण में गड्ढा खोदकर उसमें चांदी का नाग-नागिन, कछुआ, पंचरत्न, तांबे का सिक्का और 5 शिलाएं स्थापित कर वैदिक शांति हवन किया जाता है।
शिलान्यास के बिना किया गया निर्माण अधूरा और वास्तु दोषों से ग्रसित माना जाता है। शिलाओं में देवताओं का वास कराया जाता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
निर्माण कार्य बिना किसी दुर्घटना या बाधा के संपन्न होना, भूमि दोषों की निवृत्ति, भवन में स्थाई सुख-शांति व समृद्धि।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. भूमि शुद्धि एवं यजमान संकल्प
2. धरती माता, गणेश जी एवं वरुण देव का कलश पूजन
3. ईशान कोण में गड्ढा खनन एवं पंचामृत से शुद्धि
4. चांदी के नाग-नागिन, कछुआ, सुपारी, तांबे का सिक्का व पंचरत्न स्थापन
5. पांच नूतन शिलाओं (ईंटों) का कुमकुम, अक्षत व पुष्पों से अभिषेक व पूजन
6. वास्तु समिधा व शुद्ध घी से भूमि शांति हवन
7. प्रथम शिला की नींव में प्रतिष्ठा, महाआरती एवं मिष्ठान्न वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: चांदी का नाग-नागिन जोड़ा, तांबे का कछुआ, 5 ईंटें/शिलाएं, पंचरत्न, सुपारी, तांबे का सिक्का, रोली, अक्षत, नारियल, शुद्ध घी, हवन समिधा।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
वास्तु समिधा (गूलर, पलाश, पीपल) तथा शुद्ध घी व खीर से 108 आहुतियों का भूमि शांति हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से यजमान के प्लॉट / निर्माण स्थल पर (उज्जैन अथवा अखिल भारतीय) पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: वैशाख, श्रावण, मार्गशीर्ष, पौष, फाल्गुन मास तथा शुभ लग्न मुहूर्त। प्रातःकाल स्थिर लग्न में।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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