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मां बगलामुखी पीतांबरा शत्रु बाधा निवारण अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 09 अगस्त 2026 • 257 पाठक
मां बगलामुखी पीतांबरा शत्रु बाधा निवारण अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
घोर शत्रु बाधा, षड्यंत्र, अनैतिक मुकदमों एवं व्यापारिक संकट से मुक्ति हेतु उज्जैन में पीली सरसों, हल्दी, पीले वस्त्र व हल्दी माला से 36,000 अथवा सवा लाख मंत्र जप व हवन। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं, जिन्हें "पीतांबरा" भी कहा जाता है। यह स्तम्भन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो विरोधियों की वाक्-शक्ति, बुद्धि और षड्यंत्र को तुरंत निष्प्रभावी कर देती हैं। उज्जैन और मालवा का क्षेत्र (नलखेड़ा बगलामुखी सहित) अनादि काल से तांत्रिक व सात्विक शक्ति साधना का परम केंद्र रहा है। इस अनुष्ठान में पीले आसन, हल्दी की गांठों से बनी माला, पीली सरसों एवं पीले पुष्पों द्वारा देवी का आवाहन कर शत्रु शमन व विजय हेतु वैदिक संकल्प लिया जाता है।

रुद्रयामल एवं स्वतंत्र तंत्र के अनुसार महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को विजय प्राप्ति के लिए मां बगलामुखी की आराधना का ही उपदेश दिया था।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

झूठे मुकदमों से मुक्ति, विरोधियों व षड्यंत्रकारियों की वाणी का स्तम्भन, चुनाव व राजनीति में विजय, व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता में सुरक्षा।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. शुद्धि संकल्प एवं गुरु-भैरव पूजन
2. बगलामुखी स्वर्ण/पीतल यंत्र स्थापन
3. हल्दी, केसर, पंचामृत एवं पीले पुष्पों से देवी का अभिषेक
4. हल्दी की माला से 36,000 अथवा 1,25,000 मंत्रों का सस्वर जप
5. पीली सरसों, हल्दी की गांठें, गिलोय व शुद्ध घी से दशांश हवन
6. पीतांबर वस्त्र, पीला नैवेद्य (बेसन का हलवा/लड्डू) अर्पण
7. महाआरती एवं सिद्ध बगलामुखी सुरक्षा ताबीज

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: हल्दी की माला, पीली सरसों, हल्दी की गांठें, पीला वस्त्र, केसर, गिलोय, शुद्ध घी, कमल गट्टा, पीला चंदन, पंचामृत।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

पीली सरसों, हल्दी की गांठें, गिलोय और शुद्ध घी से 1008 आहुतियों का विशिष्ट स्तम्भन हवन।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन शक्ति पीठ / आश्रम क्षेत्र पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक गुरुवार, अष्टमी, चतुर्दशी, बगलामुखी जयंती, नवरात्रि। निशीथ काल (रात्रि 09:00 बजे से 12:30 बजे) अथवा प्रातःकाल।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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