आयुष्य महाहवन एवं जन्मदिवस शांति पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
सनातन संस्कृति में जन्मदिवस पर अग्नि बुझाई नहीं जाती, बल्कि आयु के वर्षों की संख्या के बराबर घी के दीपक जलाए जाते हैं। इस दिन जन्म नक्षत्र के स्वामी, कुलदेवता तथा 8 चिरंजीवियों का पूजन कर आयुष्य सूक्त से आहुतियां दी जाती हैं, जिससे वर्षभर शारीरिक व्याधियों और अकाल संकटों से रक्षा होती है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
दीर्घायु, गंभीर रोगों से रक्षा, आने वाले वर्ष में उन्नति, मानसिक शांति एवं यश में वृद्धि।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. जन्म नक्षत्र व आयु शुद्धि संकल्प
2. 8 चिरंजीवियों व कुलदेवता का आवाहन
3. जन्म वर्ष संख्या के बराबर घी के दीपों का प्रज्वलन
4. आयुष्य सूक्त व महामृत्युंजय मंत्रों से हवन
5. तिल के लड्डू व खीर का भोग अर्पण
6. बड़े-बुजुर्गों का चरण स्पर्श, रक्षा सूत्र व आशीर्वाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: शुद्ध गाय का घी, तिल, जौ, दूर्वा, कमल गट्टे, खीर, तिल के लड्डू, मिट्टी/तांबे के दीपक, पीले पुष्प एवं हवन सामग्री।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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