अंगारक दोष शांति पूजा: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
जब कुंडली के किसी भी भाव में मंगल और राहु या केतु एक साथ स्थित हों या परस्पर दृष्टि संबंध बनाएं, तो अंगारक योग का निर्माण होता है। मंगल अग्नि तत्व है और राहु वायु तत्व, जिससे यह योग अग्नि में घी का काम करता है। इससे जातक अत्यधिक क्रोधी, उतावला, दुर्घटना प्रवण तथा कानूनी विवादों में फंस सकता है। उज्जैन मंगलनाथ तीर्थ पर मंगल और राहु दोनों के वेदमंत्रों का जप तथा शीतलीकरण अभिषेक कर इस दोष को शांत किया जाता है।
मंगल की मूल जन्मस्थली मंगलनाथ पर अंगारक शांति करवाने से उग्र अग्नि तत्व शांत होकर जातक में शौर्य और धैर्य का समन्वय होता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
अत्यधिक क्रोध पर नियंत्रण, दुर्घटनाओं से रक्षा, भाइयों से विवाद की समाप्ति, रक्त विकारों में सुधार एवं करियर स्थिरता।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. शुद्धि संकल्प एवं गणपति पूजन
2. मंगल एवं राहु के संयुक्त मंडल का निर्माण
3. शिवलिंग पर पंचामृत एवं शीतल जल से अभिषेक
4. मंगल गायत्री एवं राहु बीज मंत्रों का 1008-1008 जप
5. खैर एवं दूर्वा की समिधाओं से संयुक्त दशांश हवन
6. लाल मसूर, काले उड़द एवं तांबे का दान
7. महाआरती एवं शांति पाठ
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: लाल मसूर, काले उड़द, खैर की लकड़ी, दूर्वा, तांबे का सिक्का, लाल चंदन, शुद्ध घी, काले तिल, पंचामृत।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
खैर (मंगल) एवं दूर्वा (राहु) से 108 आहुतियों का विशिष्ट शांति हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से मंगलनाथ मंदिर / रामघाट, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: मंगलवार, शनिवार, अंगारक चतुर्थी, भौम प्रदोष। प्रातः 07:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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