Sacred Diya पारंपरिक वैदिक पूजा • प्रामाणिक ज्योतिष परामर्श • सम्पूर्ण दोष निवारण • उज्जैन तीर्थ
होम › ज्ञान केंद्र › कालसर्प दोष क्या है? इसके लक्षण और उज्जैन में शास्त्रीय निवारण विधि
दोष विचार एवं समाधान

कालसर्प दोष क्या है? इसके लक्षण और उज्जैन में शास्त्रीय निवारण विधि

पंडित बलराम व्यास • 15 अगस्त 2026 • 344 पाठक
कालसर्प दोष क्या है? इसके लक्षण और उज्जैन में शास्त्रीय निवारण विधि
वैदिक ज्योतिष में कालसर्प योग का वास्तविक शास्त्रीय स्वरूप क्या है? जानिए बिना किसी भय या भ्रम के इसके परंपरागत शांति उपाय।

वैदिक ज्योतिष के ग्रंथों में ग्रहों की स्थिति और मानव जीवन पर उनके प्रभाव का विस्तृत वर्णन मिलता है। जब जन्मपत्रिका में राहु और केतु के एक ओर सभी सातों ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) आ जाते हैं, तो इसे परंपरागत रूप से कालसर्प योग की संज्ञा दी जाती है।

क्या कालसर्प योग हमेशा अनिष्टकारी होता है?

बिल्कुल नहीं। यह एक अत्यंत सामान्य भ्रांति है कि कालसर्प योग केवल बाधाएं ही देता है। इतिहास और आधुनिक युग में अनेक महान व्यक्तित्वों की कुंडली में कालसर्प योग रहा है जिन्होंने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। यह योग व्यक्ति को संघर्षशील और कर्मठ बनाता है। यदि राहु या केतु का प्रभाव अनुकूल न हो, तो केवल मानसिक तनाव अथवा कार्यों में विलंब देखने को मिल सकता है।

उज्जैन में पूजा का विशेष महत्त्व क्यों?

स्कंद पुराण के अनुसार अवंतिका (उज्जैन) महाकाल की नगरी है। काल के स्वामी भगवान शिव हैं। अतः महाकाल की छत्रछाया में, शिप्रा के पावन तट पर अथवा सिद्धवट क्षेत्र में की गई पूजा को परंपरागत रूप से अत्यंत फलदायी माना गया है।

धार्मिक विधान और पूजा श्रद्धा, आत्मशुद्धि और ईश्वर के प्रति समर्पण का मार्ग है। किसी भी पूजा को अंधविश्वास अथवा भय के कारण नहीं, अपितु आंतरिक शांति और शास्त्रसम्मत भाव से कराना चाहिए।
पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

अन्य महत्वपूर्ण लेख

छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...

नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...