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दोष विचार एवं समाधान

सोम प्रदोष एवं त्रयोदशी शिव व्रत पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 31 अगस्त 2026 • 699 पाठक
सोम प्रदोष एवं त्रयोदशी शिव व्रत पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
सोमवार को पड़ने वाले त्रयोदशी प्रदोष काल में भगवान शिव-पार्वती का विशेष दुग्धाभिषेक, दीपदान एवं प्रदोष स्तोत्र पाठ द्वारा समस्त संकटों का शमन। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और 45 मिनट बाद तक के काल को "प्रदोष काल" कहा जाता है। इस समय भगवान शिव कैलाश पर नंदी की पीठ पर आनंद तांडव करते हैं और सभी देवता उनकी स्तुति करते हैं। जब प्रदोष सोमवार को पड़ता है, तो इसे "सोम प्रदोष" कहा जाता है। यह योग मानसिक शांति, आरोग्य और ऋण (कर्ज) से मुक्ति के लिए अत्यंत चमत्कारी माना गया है। उज्जैन में प्रदोष काल में किया गया अभिषेक अत्यंत पुण्यदायी होता है।

प्रदोष व्रत करने वाले को 100 गायों के दान के समान फल प्राप्त होता है तथा चंद्र ग्रह की पूर्ण कृपा मिलती है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

ऋण (कर्ज) से मुक्ति, मानसिक अवसाद व चिंता का निवारण, दांपत्य सुख में वृद्धि एवं चंद्र दोष की शांति।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥ ॐ नमः शिवाय ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. संध्या शुद्धि एवं संकल्प
2. उमा-महेश्वर एवं नंदीश्वर पूजन
3. गाय के कच्चे दूध एवं गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक
4. चंदन, बिल्वपत्र, धतूरा एवं श्वेत पुष्प अर्पण
5. श्री प्रदोष स्तोत्र एवं शिव तांडव स्तोत्र पाठ
6. 11 अथवा 21 दीपकों का महादीपदान
7. आरती, प्रसाद वितरण एवं व्रत पारायण

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, सफेद चंदन, 108 बेलपत्र, धतूरा, गाय का घी, 21 मिट्टी/पीतल के दीपक, श्वेत पुष्प, पंचामृत।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

शिव पंचाक्षर मंत्र से 108 आहुतियों का संक्षिप्त संध्या हवन।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण / रामघाट, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक माह की दोनों त्रयोदशी तिथियां (विशेषकर सोमवार को पड़ने वाला सोम प्रदोष या शनिवार को शनि प्रदोष)। संध्या 05:30 बजे से 07:30 बजे के मध्य (प्रदोष काल)।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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