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सोलह सोमवार व्रत उद्यापन एवं शिव-गौरी पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 08 जुलाई 2026 • 847 पाठक
सोलह सोमवार व्रत उद्यापन एवं शिव-गौरी पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
मनोवांछित जीवनसाथी प्राप्ति एवं दांपत्य सुख हेतु सोलह सोमवार व्रत की पूर्णता पर शास्त्रसम्मत उद्यापन, कथा एवं हवन। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

सोलह सोमवार का व्रत भगवान शिव और मां गौरी की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत पावन व्रत है। 16 व्रतों के उपरांत इसका विधिपूर्वक उद्यापन करना शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है। इसमें चूरमे के तीन भाग, कथा श्रवण, शिव-पार्वती गठबंधन एवं ब्राह्मण भोजन का विशेष महत्व है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति, विवाह में विलंब का शमन, सुखी दांपत्य जीवन एवं मनोकामना पूर्ति।

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. गणपति व गौरी पूजन
2. पार्थिव शिवलिंग अथवा नर्मदेश्वर अभिषेक
3. सोलह सोमवार व्रत कथा श्रवण
4. तीन भाग चूरमा भोग अर्पण
5. शिव-पार्वती गठबंधन एवं हवन
6. ब्राह्मण वरण, दक्षिणा एवं क्षमा याचना

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: गेहूं का आटा, शुद्ध घी, गुड़/शर्करा, पंचामृत, बेलपत्र, सफेद पुष्प, मौली धागा, जनेऊ, फल एवं दक्षिणा।।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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