श्री सीता-राम कल्याणम एवं आदर्श दांपत्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
श्री सीता-राम का वैवाहिक संबंध त्याग, निष्ठा और धर्म का सर्वोच्च मानदंड है। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी (विवाह पंचमी) अथवा किसी भी शुभ मुहूर्त में सीताराम कल्याणम अनुष्ठान कराने से विवाह में आ रही अप्रत्याशित बाधाएं शांत होती हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
शीघ्र विवाह, योग्य वर/वधू की प्राप्ति, गृहस्थ कलह शांति एवं दांपत्य निष्ठा की वृद्धि।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. गौरी-गणेश एवं कुलदेवता पूजन
2. श्री राम एवं माता सीता का मंगलाभिषेक
3. पाणिग्रहण एवं जयमाला विधान
4. वैदिक मंगलाष्टक एवं विवाह मंत्रोच्चार
5. सिंदूर दान एवं सात वचनों का स्मरण
6. महाआरती एवं कल्याणम महाप्रसाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: जयमाला, रेशमी वस्त्र, सिंदूर, मंगलसूत्र, हल्दी की गांठें, दूर्वा, पंचामृत, नारियल, 5 प्रकार की मिठाइयां एवं हवन सामग्री।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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