शुक्र ग्रह शांति एवं सौन्दर्य/दाम्पत्य सुख अनुष्ठान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
शुक्र ग्रह प्रेम, दांपत्य सुख, सौन्दर्य, कला, वाहन, भौतिक सुख-सुविधाओं और आकर्षण के कारक हैं। जब कुंडली में शुक्र नीच (कन्या राशि), अस्त या पापदृष्ट होते हैं, तो पति-पत्नी के मध्य आकर्षण समाप्त हो जाता है, विवाह विच्छेद (तलाक) की स्थिति बनती है, गुप्त रोग होते हैं और विलासिता के साधन नहीं जुट पाते। उज्जैन में शुक्र देव की प्रसन्नता हेतु सुगंधित श्वेत पुष्प, इत्र, श्वेत चंदन, कपूर, गूलर की समिधा व चांदी की वस्तु के दान से शुक्र दोष का निवारण होता है।
शुक्राचार्य मृत-संजीवनी विद्या के ज्ञाता हैं। इनकी कृपा से व्यक्ति का व्यक्तित्व चुंबकीय और जीवन सुखमय बनता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
दांपत्य जीवन में प्रेम व सामंजस्य की पुनर्स्थापना, आकर्षण में वृद्धि, विलासिता व वाहन सुख, गुप्त व मूत्र विकारों में राहत।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. शुद्धि संकल्प एवं यजमान पूजन
2. शुक्र यंत्र एवं माता लक्ष्मी का सुगंधित जल से अभिषेक
3. सफेद चंदन, इत्र, श्वेत पुष्प, मिश्री व खीर अर्पण
4. वैदिक शुक्र बीज मंत्र एवं भार्गव स्तोत्र के 1008 जप
5. गूलर (उदुम्बर) समिधा, कपूर, खीर व घृत से 108 आहुति हवन
6. श्वेत वस्त्र, चावल, चीनी, चांदी व इत्र का दान
7. महाआरती एवं रक्षा सूत्र बंधन
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: गूलर की समिधा (उदुम्बर), सुगंधित इत्र, श्वेत चंदन, कपूर, मिश्री, खीर, सफेद वस्त्र, शुद्ध घी, चावल, पंचामृत।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
गूलर वृक्ष की समिधा, कपूर, खीर एवं शुद्ध घी से 108 आहुतियों का शुक्र शांति हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन आश्रम / रामघाट तीर्थ पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक शुक्रवार, शरद पूर्णिमा, अक्षय तृतीया। प्रातः 07:30 से 11:00 बजे अथवा संध्या समय।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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