शनि दोष एवं साढ़ेसाती शांति पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
शनि देव कर्मफलदाता और न्याय के देवता हैं। जब कुंडली में शनि की साढ़ेसाती (साढ़े सात वर्ष की अवधि) या ढैय्या (ढाई वर्ष की अवधि) आती है, तो व्यक्ति को अत्यधिक परिश्रम, मानसिक तनाव, स्वास्थ्य विकार एवं आर्थिक संकटों से गुजरना पड़ता है। उज्जैन के प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर एवं त्रिवेणी संगम पर सरसों के तेल से अभिषेक, काले उड़द, लोहे की वस्तु एवं नीले वस्त्र का दान कर शनि देव की कृपा प्राप्त की जाती है।
स्कंद पुराण एवं पद्म पुराण में शनि देव की स्तुति से राजा दशरथ को संकट मुक्ति मिलने का वृत्तांत है। शनि देव न्यायप्रिय हैं, सात्विक भाव से पूजन करने पर वे रंक को भी राजा बना देते हैं।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
शनि साढ़ेसाती एवं ढैय्या के कष्टों में राहत, कोर्ट-कचहरी व मुकदमों में शांति, हड्डियों व जोड़ों के रोगों में आराम, व्यापार में रुकावटों का निवारण।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. स्वस्तिवाचन एवं यजमान संकल्प
2. पीपल वृक्ष एवं शनिदेव का पूजन
3. शुद्ध सरसों के तेल से तैलाभिषेक एवं छायापात्र दान
4. काले तिल, नीले पुष्प, काले उड़द एवं शमीपत्र अर्पण
5. शनि गायत्री एवं दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ
6. शमी समिधा एवं काले तिल से दशांश हवन
7. लोहे की वस्तु, काले वस्त्र व उड़द का दान एवं महाआरती
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: शुद्ध सरसों का तेल, काले तिल, काले उड़द, शमीपत्र, नीले पुष्प, लोहे की कील/सिक्का, काला वस्त्र, नवग्रह समिधा।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
शमी वृक्ष की समिधा, काले तिल, घृत एवं जौ से 108 आहुतियों का हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से त्रिवेणी शनि मंदिर / नवग्रह तीर्थ, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक शनिवार, शनिचरी अमावस्या, शनि त्रयोदशी। संध्याकाल (गोधूलि वेला) 05:00 बजे से 07:30 बजे तक सर्वोत्तम।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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