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द्वादश द्रव्य रुद्राभिषेक पूजा: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 20 सितंबर 2026 • 331 पाठक
द्वादश द्रव्य रुद्राभिषेक पूजा: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
उज्जैन महाकाल तीर्थ पर 12 पवित्र द्रव्यों (दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस, गंगाजल आदि) तथा शुक्ल यजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी पाठ द्वारा भगवान शिव का महाभिषेक। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

रुद्राभिषेक भगवान शिव की सबसे प्रिय और प्रभावशाली आराधना है। "रुतम् द्रावयतीति रुद्रः" अर्थात जो सभी दुखों का नाश कर दे, वही रुद्र है। द्वादश द्रव्य रुद्राभिषेक में 12 शास्त्रीय औषधीय द्रव्यों—गाय का कच्चा दूध (दीर्घायु), गन्ने का रस (लक्ष्मी व धन), मधु (पाप नाश), घृत (वंश वृद्धि), इत्र (यश), दूर्वा जल (रोग शांति), कुश जल (संकट नाश) आदि से निरंतर धारा प्रवाहित करते हुए वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ किया जाता है।

शिवपुराण में कहा गया है कि रुद्राभिषेक से भगवान शिव जितने शीघ्र प्रसन्न होते हैं, उतने किसी अन्य साधन से नहीं। महाकाल ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में इसका फल अनंत गुना हो जाता है।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

मनोकामना सिद्धि, मानसिक तनाव व अवसाद से मुक्ति, आर्थिक समृद्धि, गृह क्लेश का निवारण एवं आध्यात्मिक उन्नति।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

नमस्ते रुद्र मन्यव उतो त इषवे नमः । बाहुभ्यामुत ते नमः ॥ ॐ नमः शिवाय ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. गुरु-गणपति पूजन एवं कलश स्थापन
2. शिवलिंग का पवित्रीकरण एवं आचमन
3. द्वादश द्रव्यों की क्रमिक अभिषेक धारा (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा, गन्ने का रस, पंचामृत, नारियल जल, गुलाब जल, कुश जल, भस्म जल, गंगाजल)
4. रुद्राष्टाध्यायी (चमकम् व नमकम्) पाठ
5. भस्म, चंदन, अक्षत, बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा एवं मंदार पुष्प से दिव्य शृंगार
6. 108 आहुति शिव पंचाक्षर हवन
7. कपूर आरती एवं महाप्रसाद वितरण

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, गन्ने का रस, गंगाजल, भस्म, बेलपत्र (108), शमीपत्र, धतूरा, श्वेतार्क पुष्प, सफेद चंदन।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

शिव पंचाक्षर मंत्र तथा महामृत्युंजय मंत्र से 108 आहुतियों का पावन हवन।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण / रामघाट, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक सोमवार, शिवरात्रि, प्रदोष व्रत, सावन मास, मासिक शिवरात्रि। प्रातः 06:30 बजे से 11:30 बजे अथवा प्रदोष काल (संध्या 05:30 से 07:30)।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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