श्री राम रक्षा स्तोत्र अनुष्ठान एवं मारुति हवन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
राम रक्षा स्तोत्र भगवान शंकर द्वारा स्वप्न में ऋषि बुध कौशिक को प्रदान किया गया था। इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों (शिर, ललाट, नेत्र, कर्ण, नासिका आदि) की रक्षा का दिव्य कवच है। जब व्यक्ति गुप्त शत्रुओं, मुकदमेबाजी, अज्ञात भय अथवा नकारात्मक ऊर्जा से घिरा हो, तो राम रक्षा स्तोत्र के 108 संपुटित पाठ तथा दशांश मारुति हवन से अजेय सुरक्षा घेरा निर्मित होता है।
पद्म पुराण के अनुसार "रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति।" राम नाम स्मरण ही परम रक्षा है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
शत्रु भय से मुक्ति, अदालती विवादों में विजय, गंभीर व्याधियों में प्राण रक्षा, भय व अवसाद का निवारण।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. स्वस्तिवाचन एवं यजमान संकल्प
2. श्रीराम दरबार एवं हनुमान जी का षोडशोपचार पूजन
3. अंगन्यास, करन्यास एवं दिग्विजय ध्यान
4. योग्य ब्राह्मणों द्वारा राम रक्षा स्तोत्र के 108 पाठ
5. राम नाम मंत्र एवं मारुति बीज मंत्र से दशांश हवन
6. अभिमंत्रित रक्षा सूत्र एवं राम कवच की प्रतिष्ठा
7. महाआरती एवं प्रसाद वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: श्रीराम दरबार चित्र/विग्रह, तुलसी दल, पीले पुष्प, पीला चंदन, गुग्गल, शुद्ध घी, हवन समिधा, मौली (रक्षा सूत्र), पंचामृत।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
राम नाम मंत्र तथा श्री राम रक्षा स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक से 108 आहुतियों का हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन आश्रम / रामघाट तीर्थ पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक मंगलवार, रविवार, रामनवमी, विजयदशमी, हनुमान जयंती। प्रातः 07:00 बजे से 11:30 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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