राहु-केतु ग्रह शांति एवं नागबलि विधान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
ज्योतिष में राहु को मायावी एवं आकस्मिक घटनाओं का कारक तथा केतु को अलगाव व मोक्ष का कारक माना गया है। कुंडली में राहु-केतु की अशुभ स्थिति से जातक को अनिर्णय की स्थिति, अचानक आर्थिक नुकसान, भय, बुरे सपने तथा गुप्त शत्रुओं से पीड़ा होती है। उज्जैन के पावन तीर्थ पर राहु के लिए दूर्वा व सिक्के तथा केतु के लिए कुशा व ध्वज के साथ वैदिक अग्निहोत्र संपन्न किया जाता है।
वराह पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के समय मोहिनी रूप धारण कर भगवान विष्णु द्वारा स्वरभानु दैत्य का मस्तक और धड़ अलग करने से राहु और केतु की उत्पत्ति हुई थी। महाकाल तीर्थ में इनका शमन सर्वाधिक तीव्र होता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
अचानक आने वाली विपत्तियों से सुरक्षा, मानसिक भ्रम व अनिद्रा का निवारण, नशा व व्यसन से मुक्ति, कैरियर में स्थिरता।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. यजमान संकल्प एवं शुद्धि विधान
2. राहु एवं केतु यंत्र स्थापन व पूजन
3. राहु के लिए दूर्वा एवं काले उड़द, केतु के लिए कुशा एवं दोरंगे तिल का अर्पण
4. राहु-केतु वैदिक एवं तांत्रिक बीज मंत्र जप
5. दूर्वा एवं कुशा समिधा से दशांश हवन
6. राहु-केतु दान (सिक्का, तिल, कंबल, नारियल)
7. आरती एवं रक्षा सूत्र बंधन
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: दूर्वा, कुशा घास, काले उड़द, दोरंगे तिल, सरसों, नारियल, काले/नीले व चितकबरे वस्त्र, शुद्ध घी, नवग्रह समिधा।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
दूर्वा (राहु समिधा) तथा कुशा (केतु समिधा) से 108-108 आहुतियों का विशिष्ट हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से रामघाट / नवग्रह आश्रम, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: शनिवार, मंगलवार, अमावस्या अथवा ग्रहण के उपरांत। संध्याकाल अथवा राहुकाल के समय।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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