श्री पंचमुखी हनुमान महाकवच पूजन एवं सिंदूर अर्पण: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
रामायण के पाताल कांड में जब अहिरावण ने भगवान राम और लक्ष्मण का हरण कर लिया, तब उनके प्राणों की रक्षा हेतु हनुमान जी ने पांच दिशाओं में पांच दीपकों को एक साथ बुझाने के लिए पंचमुखी रूप धारण किया था। पूर्व मुख (वानर) पापों का नाश करता है, दक्षिण मुख (नृसिंह) भय व शत्रु का नाश करता है, पश्चिम मुख (गरुड़) विष व सर्प दोष हरता है, उत्तर मुख (वराह) ऐश्वर्य देता है और ऊर्ध्व मुख (हयग्रीव) ज्ञान व मोक्ष देता है। उज्जैन में यह तांत्रिक व सात्विक दोनों विधियों से संपन्न होता है।
पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करने से व्यक्ति के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा चक्र बन जाता है, जिसे कोई नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
तांत्रिक बाधा, नजर दोष, ऊपरी हवा, भयानक सपने, अज्ञात भय, कोर्ट केस एवं असाध्य संकटों से रक्षा।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. शुद्धि संकल्प एवं भैरव-गणेश स्मरण
2. पंचमुखी हनुमान यंत्र स्थापन
3. पांचों मुखों का पृथक-पृथक मंत्रोच्चार सहित पंचामृत अभिषेक
4. चमेली का तेल, सिंदूर, लाल कनेर पुष्प एवं 108 लौंग-इलायची अर्पण
5. श्री पंचमुख हनुमत्कवच के 21 आवर्तन पाठ
6. सरसों, गुग्गल, लोबान एवं शुद्ध घी से 108 आहुति हवन
7. महाआरती एवं सिद्ध ताबीज/कवच धारण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: पंचमुखी हनुमान चित्र/यंत्र, चमेली का तेल, शुद्ध सिंदूर, लाल कनेर पुष्प, 108 लौंग, 108 इलायची, पीली सरसों, लोबान, गुग्गल, शुद्ध घी।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
पीली सरसों, गुग्गल, लोबान, गाय के घी एवं पलाश समिधा से 108 आहुतियों का सुरक्षात्मक हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन हनुमान मंदिर / आश्रम पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, अमावस्या। संध्या समय 05:00 बजे से 08:00 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण लेख
छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...
नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...