नवरात्रि दुर्गा सप्तशती संपुट पाठ एवं नवचंडी हवन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
उज्जैन के पावन शक्तिपीठ मां हरसिद्धि एवं मां गढ़कालिका के सान्निध्य में नवरात्रि अनुष्ठान का फल अनंत गुना होता है। मार्कंडेय पुराण के दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोकों का विद्वान ब्राह्मणों द्वारा नित्य पाठ किया जाता है तथा नवमी तिथि पर 108 आहुतियों से नवचंडी हवन संपन्न होता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
शत्रु पराजय, नकारात्मक शक्तियों का नाश, धन-धान्य समृद्धि, यश एवं मां भगवती की साक्षात रक्षा।
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. प्रतिपदा को घटस्थापना व जौ (जवारे) बोना
2. अखंड ज्योति प्रज्वलन एवं देवी आवाहन
3. नित्य दुर्गा सप्तशती 13 अध्याय संपुट पाठ
4. अष्टमी/नवमी को नवचंडी महाहवन
5. नौ कन्याओं एवं एक बटुक का पाद प्रक्षालन व पूजन
6. पूर्णाहुति, क्षमा प्रार्थना एवं महाप्रसाद
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: मिट्टी का कलश, जौ, लाल चुनरी, नारियल, श्रृंगार सामग्री, कमल गट्टा, लौंग का जोड़ा, बताशे, कपूर, गुग्गल, खीर एवं हवन समिधा।।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से Ujjain, Madhya Pradesh पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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