Sacred Diya पारंपरिक वैदिक पूजा • प्रामाणिक ज्योतिष परामर्श • सम्पूर्ण दोष निवारण • उज्जैन तीर्थ
होम › ज्ञान केंद्र › नवग्रह शांति पूजन एवं हवन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
दोष विचार एवं समाधान

नवग्रह शांति पूजन एवं हवन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 18 सितंबर 2026 • 366 पाठक
नवग्रह शांति पूजन एवं हवन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
कुंडली के प्रतिकूल ग्रहों के दोषों को शांत कर 9 ग्रहों की विशेष 9 प्रकार की समिधाओं, रत्नों एवं वैदिक मंत्रों द्वारा संपूर्ण नवग्रह शांति। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

मनुष्य के जीवन का सुख-दुख, स्वास्थ्य, कैरियर एवं भाग्य नवग्रहों की चाल पर निर्भर करता है। जब कुंडली में कोई ग्रह नीच, वक्री या पापदृष्ट होता है, तो जीवन के उस क्षेत्र में बाधाएं आती हैं। नवग्रह शांति विधान में नवग्रह मंडल का निर्माण कर प्रत्येक ग्रह की अधिदेवता व प्रत्यधिदेवता सहित पूजा की जाती है तथा 9 ग्रहों की विशेष समिधाओं (मदार, पलाश, खैर, अपामार्ग, पीपल, गूलर, शमी, दूर्वा, कुशा) से हवन किया जाता है।

वृहत्पराशर होराशास्त्र एवं मत्स्य पुराण के अनुसार नवग्रहों की प्रसन्नता के बिना कोई भी शुभ कार्य पूर्ण फल नहीं देता।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

दशा-अंतर्दशा के अशुभ प्रभावों की शांति, ग्रह क्लेश दूर करना, व्यापार में लाभ, मानसिक स्थिरता एवं सर्वांगीण उन्नति।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

ब्रह्मामुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च । गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. स्वस्तिवाचन एवं यजमान संकल्प
2. सर्वतोभद्र एवं नवग्रह मंडल निर्माण
3. नवग्रहों का आवाहन, प्राण-प्रतिष्ठा एवं षोडशोपचार पूजन
4. प्रत्येक ग्रह के 108 वैदिक मंत्रों का जप
5. नवग्रहों की 9 विशिष्ट समिधाओं से दशांश हवन
6. नवधान्य एवं नववस्त्र अर्पण
7. आरती, क्षमा प्रार्थना एवं आशीर्वाद

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: नवधान्य (9 प्रकार के अनाज), 9 रंगों के वस्त्र, 9 ग्रहों की समिधा, शुद्ध घी, काले तिल, जौ, गुग्गल, शहद, पंचामृत।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

9 ग्रहों की 9 विशेष औषधीय समिधाओं से कुल 108x9 आहुतियां अर्पित की जाती हैं।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उज्जैन नवग्रह मंदिर / आश्रम, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: रविवार, बुधवार, गुरुवार अथवा जातक की जन्म राशि अनुसार शुभ वार। प्रातः 07:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

अन्य महत्वपूर्ण लेख

छठ महापर्व सूर्य षष्ठी एवं उषा अर्घ्य पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर शिप्रा अथवा पवित्र जलाशय में खड़े होकर अस्ताचलगामी एवं उदयगामी सूर्य को सूप, ठेकुआ...

नवीन ऑफिस, दुकान एवं प्रतिष्ठान उद्घाटन पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

नवीन दुकान, शोरूम, फैक्ट्री अथवा कॉर्पोरेट ऑफिस के शुभारंभ पर विघ्न निवारण, वास्तु शुद्धि, बहीखाता स्थापन एवं कुबेर...