नवचंडी महायज्ञ एवं पूर्णाहुति विधान: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
देवी भागवत एवं कालिका पुराण में नवचंडी यज्ञ को सभी यज्ञों का शिरोमणि कहा गया है। इसमें 9 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा एक साथ दुर्गा सप्तशती के 9 संपूर्ण पाठ (कुल 6300 श्लोक) संपन्न किए जाते हैं। तत्पश्चात विशाल यज्ञवेदी पर औषधीय समिधा, शुद्ध घृत, पंचमेवा, खीर एवं जायफल-कमलगट्टे से सहस्र आहुतियां दी जाती हैं। इस यज्ञ के धुएं और मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण शुद्ध होता है और यजमान के समस्त ज्ञात-अज्ञात दोष, वास्तु दोष व गृह क्लेश भस्म हो जाते हैं।
नवचंडी यज्ञ के दर्शन मात्र से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। उज्जैन की पावन शक्तिपीठ भूमि पर इसका फल अनंत गुना है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
व्यापार व उद्योग में अपार सफलता, राजकीय व कानूनी बाधाओं का निवारण, कुल की रक्षा, रोग मुक्ति एवं अखंड समृद्धि।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. अरणि मंथन अथवा अग्नि स्थापन एवं नवग्रह-सर्वतोभद्र मंडल पूजन
2. 9 ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती के 9 आवर्तनों का एक साथ पाठ
3. सप्तशती के प्रत्येक मंत्र से विशाल चंडी यज्ञवेदी पर आहुतियां
4. खीर, घृत, जायफल, कमलगट्टा एवं पंचमेवा से विशेष आहुतियां
5. सूखा गोला, रेशमी वस्त्र एवं सिक्कों से भव्य पूर्णाहुति
6. वसोर्धारा, भस्म धारण एवं 9 कन्या व ब्राह्मण भोजन
7. महाआरती एवं महाप्रसाद वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: शुद्ध देशी घी (20 किग्रा), हवन समिधा (1 quintal), 9 सूखे गोले (नारियल), लाल वस्त्र, कमलगट्टा, जायफल, गुग्गल, खीर।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
700x9 = 6300 मंत्रों से युक्त विशाल शास्त्रीय नवचंडी महाहवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से हरसिद्धि तीर्थ / महाकाल आश्रम, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: नवरात्रि (चैत्र/शारदीय), पूर्णिमा, गुरु पुष्य, शुभ मुहूर्त। प्रातः 07:00 बजे से अपराह्न 02:30 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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