मां गढ़कालिका एवं महाकाल भैरव सात्विक शांति: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
उज्जैन स्थित मां गढ़कालिका का शक्तिपीठ अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि यहीं पर मां भगवती की कृपा से मूर्ख कहे जाने वाले कालिदास महाकवि बने और उन्होंने मेघदूत व रघुवंश जैसे अमर महाकाव्यों की रचना की। वहीं भगवान कालभैरव को अवंतिका का द्वारपाल और कोतवाल माना जाता है। इस अनुष्ठान में दोनों पावन पीठों पर पूर्ण सात्विक मर्यादा के साथ दुग्धाभिषेक, नींबू की माला, काले उड़द एवं भस्म से शांति विधान संपन्न किया जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार अवंतिका क्षेत्र में कालभैरव और कालिका की शरण लेने वाले व्यक्ति को यमराज का भी भय नहीं रहता।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
बुद्धि व वाणी में चमत्कारिक वृद्धि, परीक्षा व साक्षात्कार में सफलता, अज्ञात भय व ऊपरी बाधाओं का समूल नाश।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. यजमान शुद्धि एवं संकल्प
2. मां गढ़कालिका एवं कालभैरव का दुग्ध व सुगंधित जल से अभिषेक
3. सिंदूर, काजल, नींबू की माला एवं काले उड़द अर्पण
4. कालिका अष्टोत्तरशत एवं कालभैरव अष्टकम का सस्वर पाठ
5. काले तिल, सरसों, लौंग एवं गुग्गल से दशांश शांति हवन
6. सरसों के तेल के 8 दीपकों का दीपदान
7. महाआरती एवं रक्षा भस्म धारण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: गाय का कच्चा दूध, नींबू की माला, काले उड़द, काले तिल, सरसों का तेल, सिंदूर, गुग्गल, लौंग, कपूर, लाल पुष्प।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
काले तिल, जौ, गुग्गल एवं सरसों से 108 आहुतियों का सात्विक शांति हवन।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से गढ़कालिका मंदिर / कालभैरव तीर्थ, उज्जैन पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक रविवार, मंगलवार, कालभैरव अष्टमी, नवरात्रि, अमावस्या। गोधूलि वेला अथवा रात्रि 08:00 बजे से 11:00 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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