बाल गोपाल पंचामृत अभिषेक एवं शृंगार पूजन: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व
उज्जैन वही पावन तीर्थ है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ महर्षि सांदीपनि के आश्रम में 64 कलाओं और 14 विद्याओं की शिक्षा ग्रहण की थी। बाल गोपाल का पंचामृत अभिषेक वात्सल्य भाव की सर्वोच्च भक्ति है। इस पूजन में लड्डू गोपाल जी को शंख में गंगाजल, पंचामृत, केसर एवं सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराकर नवीन पीतांबर, मोर मुकुट, बांसुरी एवं घुंघराले केशों से अलंकृत किया जाता है।
श्रीमद्भागवत के अनुसार बाल गोपाल की सेवा जिस घर में होती है, वहां साक्षात कामधेनु और लक्ष्मी का वास होता है।
२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल
घर में खुशहाली, बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य व विद्या, पारिवारिक क्लेश की समाप्ति एवं कृष्ण कृपा।
३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र
४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)
1. पवित्रीकरण एवं संकल्प
2. शंख द्वारा पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) से अभिषेक
3. इत्र, गुलाब जल एवं केसर जल से शीतल स्नान
4. सुंदर वस्त्र, मोर मुकुट, कुंडल, कटिकाछनी एवं बांसुरी शृंगार
5. चंदन, अक्षत, तुलसी दल एवं सुगंधित पुष्प अर्पण
6. माखन, मिश्री, ऋतुफल एवं मिष्ठान्न भोग
7. आरती एवं चरणामृत वितरण
५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री
इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: पंचामृत द्रव्य, शंख, केसर, इत्र, मोरपंख मुकुट, बांसुरी, नए वस्त्र, तुलसी दल, ताजा मक्खन, मिश्री।।
६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान
संक्षिप्त कृष्ण गायत्री हवन (21 आहुतियां)।
७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से सांदीपनि आश्रम / घर पर / उज्जैन पीठ पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।
शुभ दिन एवं मुहूर्त: प्रत्येक बुधवार, गुरुवार, जन्माष्टमी, एकादशी। प्रातः 07:30 बजे से 10:30 बजे तक।
८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन
देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।
पंडित बलराम व्यास
उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।
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