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उज्जैन तीर्थ महात्म्य

धनदा कुबेर एवं अष्टलक्ष्मी महायज्ञ: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य

पंडित बलराम व्यास • 03 अगस्त 2026 • 366 पाठक
धनदा कुबेर एवं अष्टलक्ष्मी महायज्ञ: संपूर्ण शास्त्रीय विधि, महत्व एवं उज्जैन में अनुष्ठान रहस्य
देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव एवं मां लक्ष्मी के आठों स्वरूपों का महायज्ञ, कुबेर कुंजिका पाठ, कमलगट्टा व गूलर समिधा हवन द्वारा अटके हुए धन की प्राप्ति। जानिए उज्जैन अवंतिका क्षेत्र में पंडित बलराम व्यास द्वारा शास्त्रोक्त विधि, शुभ मुहूर्त एवं व्यक्तिगत संकल्प का संपूर्ण विधान।

१. अनुष्ठान की पृष्ठभूमि एवं शास्त्रोक्त महत्व

महाभारत एवं शिव महापुराण के अनुसार कुबेर देव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर नव निधियों और संपूर्ण ब्रह्मांड के धन-कोष का स्वामित्व प्राप्त किया था। अष्टलक्ष्मी (आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी) जीवन के सभी आठ प्रकार के ऐश्वर्य की दात्री हैं। इस महायज्ञ में कुबेर यंत्र एवं अष्टलक्ष्मी चक्र की स्थापना कर 1008 आहुतियों से कुबेर गायत्री व धनदा मंत्रों द्वारा हवन संपन्न किया जाता है।

कुबेर यंत्र की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ यह यज्ञ करने से जातक का धन-कोष सदैव परिपूर्ण रहता है और अनावश्यक खर्चे रुकते हैं।

२. पूजा का मूल उद्देश्य एवं प्राप्त होने वाले फल

व्यापार में भारी मुनाफा, रुका हुआ या फंसा हुआ धन वापस मिलना, नई संपत्ति व भूमि क्रय, आर्थिक स्थिरता।

३. सिद्ध वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा ॥

४. शास्त्रसम्मत पूजन विधि-विधान (क्रमबद्ध चरण)

1. यजमान संकल्प एवं स्वस्तिवाचन
2. कुबेर यंत्र एवं अष्टलक्ष्मी मंडल स्थापन
3. पंचामृत, इत्र व सुवर्ण जल से अभिषेक
4. कुबेर मंत्र एवं अष्टलक्ष्मी स्तोत्र के 1008 जप
5. कमलगट्टा, मखाना, खीर, गुग्गल व गूलर समिधा से बृहद् हवन
6. 108 आहुति कुबेर गायत्री पूर्णाहुति
7. महाआरती एवं सिद्ध कुबेर कुंजी/यंत्र भेंट

५. आवश्यक पावन पूजन सामग्री

इस वैदिक अनुष्ठान में १००% शुद्ध एवं प्राकृतिक शास्त्रीय सामग्री का उपयोग किया जाता है: कुबेर यंत्र, कमलगट्टा, मखाने, जायफल, शुद्ध घी, गूलर की समिधा, खीर, पंचरत्न, लाल व पीले पुष्प, इत्र।।

६. वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति विधान

गूलर समिधा, कमलगट्टा एवं शुद्ध घी से 1008 आहुतियों का भव्य धनदा हवन।

७. अवंतिका तीर्थ (उज्जैन) में अनुष्ठान का विशेष प्रभाव

महाकाल की पावन नगरी उज्जैन (अवंतिका) अनादि काल से मोक्ष और ग्रह शांति की तपोभूमि रही है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से व्यापारिक स्थल / घर / उज्जैन पीठ पर वैदिक पुरोहितों द्वारा यजमान के नाम एवं गोत्र से संपन्न किया जाता है।

शुभ दिन एवं मुहूर्त: धनतेरस, दीपावली, अक्षय तृतीया, प्रत्येक माह की त्रयोदशी व शुक्रवार। प्रातः 07:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।

८. व्यक्तिगत संकल्प: साक्षात उपस्थिति अथवा लाइव वीडियो दर्शन

देश-विदेश के जो यजमान साक्षात उज्जैन आने में असमर्थ हैं, वे अपने नाम, गोत्र व नक्षत्र अनुसार लाइव ऑनलाइन संकल्प द्वारा भी इस अनुष्ठान को संपन्न करा सकते हैं। पूजनोपरांत अभिमंत्रित रक्षासूत्र, भस्म एवं महाप्रसाद डाक द्वारा यजमान के गृह पते पर प्रेषित किया जाता है।

पंडित बलराम व्यास

पंडित बलराम व्यास

उज्जैन अवंतिका क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैदिक पुरोहित। विगत 15+ वर्षों से श्री महाकालेश्वर, मंगलनाथ तीर्थ, सिद्धवट एवं रामघाट पर शास्त्रसम्मत विधि-विधान से कालसर्प दोष, मंगल भात पूजा, पितृ दोष शांति, महामृत्युंजय जप एवं संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

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